स्वीटी सुपारी परिवार की अनूठी पहल, स्व. सुरेश चन्द्र अग्रवाल की स्मृति में मेगा हेल्थ...
- 11h ago
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली में आई विनाशकारी आपदा को एक वर्ष पूरा होने वाला है, लेकिन उस भयावह त्रासदी के जख्म आज भी ताजा हैं। पिछले साल 5 अगस्त 2025 को खीरगंगा में आए मलबे और सैलाब ने कुछ ही मिनटों में धराली का भूगोल बदल दिया था। होटल, मकान, दुकानें और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था।
आपदा के दौरान सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और बीआरओ ने कई दिनों तक राहत एवं बचाव अभियान चलाया। इस त्रासदी में कई लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए। आज भी कई परिवार अपने परिजनों के अंतिम सुराग का इंतजार कर रहे हैं।
धराली के स्थानीय लोगों का कहना है कि इस आपदा ने केवल उनके घर और कारोबार ही नहीं छीने, बल्कि वर्षों की मेहनत, यादें और आजीविका भी मलबे में दफन कर दी। एक साल बाद भी प्रभावित क्षेत्र में तबाही के निशान साफ दिखाई देते हैं और पुनर्वास की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है।
हालांकि गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर अस्थायी रूप से यातायात बहाल कर दिया गया है, लेकिन स्थायी सुरक्षा कार्य और पुनर्वास की योजनाएं अभी भी अधूरी हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि पहली बरसी तक सरकार सुरक्षा और पुनर्वास के कार्यों में और तेजी लाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
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