हाथी टीला कब्रिस्तान विवाद: बाउंड्रीवॉल तोड़ने पहुंचा प्रशासन, भारी पुलिस बल तैनात...
- 11h ago
उत्तर प्रदेश में ड्रिंक एंड ड्राइव को लेकर कानून बेहद सख्त है। अगर आप शराब पीकर वाहन चलाते हुए पकड़े जाते हैं, तो सिर्फ चालान ही नहीं बल्कि जेल तक जाना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाती है, क्योंकि यह न केवल आपकी बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की जान के लिए भी बड़ा खतरा होता है।
मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 185 के अनुसार, शराब या नशीले पदार्थ के प्रभाव में वाहन चलाना दंडनीय अपराध है। यदि किसी चालक के खून में एल्कोहल की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई जाती है, तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाती है।
इसके अलावा, बार-बार नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड या रद्द भी किया जा सकता है।
जब ट्रैफिक पुलिस को किसी चालक पर शराब पीकर गाड़ी चलाने का शक होता है, तो उसे रोककर जांच की जाती है। इसके लिए ब्रेथ एनालाइजर मशीन का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें चालक को फूंक मारनी होती है। इससे तुरंत शरीर में मौजूद एल्कोहल की मात्रा का पता चल जाता है। सीमा से अधिक होने पर मौके पर चालान या गिरफ्तारी तक हो सकती है।
ड्रिंक एंड ड्राइव का असर सिर्फ जुर्माने या सजा तक सीमित नहीं रहता। अगर आप इस अपराध में पकड़े जाते हैं, तो आपकी वाहन बीमा पॉलिसी महंगी हो सकती है या कंपनी उसे रद्द भी कर सकती है। भविष्य में बीमा लेना भी मुश्किल हो सकता है।
शराब पीने के बाद व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता और रिएक्शन टाइम कमजोर हो जाता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि सरकार इस पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए है।
उत्तर प्रदेश में ड्रिंक एंड ड्राइव को लेकर कानून बेहद सख्त है। अगर आप शराब पीकर वाहन चलाते हुए पकड़े जाते हैं, तो सिर्फ चालान ही नहीं बल्कि जेल तक जाना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाती है, क्योंकि यह न केवल आपकी बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की जान के लिए भी बड़ा खतरा होता है। मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 185 के अनुसार, शराब या नशीले पदार्थ के प्रभाव में वाहन चलाना दंडनीय अपराध है। यदि किसी चालक के खून में एल्कोहल की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई जाती है, तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाती है। क्या है सजा का प्रावधान? पहली बार पकड़े जाने पर: ₹10,000 तक का जुर्माना या 6 महीने तक की जेल, या दोनों दोबारा गलती करने पर: ₹15,000 तक का जुर्माना और 2 साल तक की जेल इसके अलावा, बार-बार नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड या रद्द भी किया जा सकता है। कैसे होती है जांच? जब ट्रैफिक पुलिस को किसी चालक पर शराब पीकर गाड़ी चलाने का शक होता है, तो उसे रोककर जांच की जाती है। इसके लिए ब्रेथ एनालाइजर मशीन का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें चालक को फूंक मारनी होती है। इससे तुरंत शरीर में मौजूद एल्कोहल की मात्रा का पता चल जाता है। सीमा से अधिक होने पर मौके पर चालान या गिरफ्तारी तक हो सकती है। बीमा पर भी पड़ता है असर ड्रिंक एंड ड्राइव का असर सिर्फ जुर्माने या सजा तक सीमित नहीं रहता। अगर आप इस अपराध में पकड़े जाते हैं, तो आपकी वाहन बीमा पॉलिसी महंगी हो सकती है या कंपनी उसे रद्द भी कर सकती है। भविष्य में बीमा लेना भी मुश्किल हो सकता है। क्यों है यह नियम इतना सख्त? शराब पीने के बाद व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता और रिएक्शन टाइम कमजोर हो जाता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि सरकार इस पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए है।
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