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आज के दौर में युवाओं का रुझान जिम की ओर बढ़ रहा है, लेकिन भारतीय परंपरा के अखाड़े आज भी देश को बड़े-बड़े पहलवान दे रहे हैं। अगर आप भी पहलवान बनने का सपना देखते हैं तो सिर्फ ताकत ही नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम और कठिन मेहनत भी जरूरी है। इसी को जानने के लिए अभी न्यूज़ पहुंचा मथुरा के यमुनापार स्थित गोपाल आश्रम अखाड़े, जहां वर्षों से पहलवान तैयार किए जा रहे हैं।
गोपाल आश्रम के उस्ताद शिवालय पहलवान और खलीफा नरेंद्र चतुर्वेदी की देखरेख में प्रतिदिन सुबह और शाम 100 से अधिक पहलवान दंड-बैठक, सपाटे, कुश्ती और पारंपरिक व्यायाम का अभ्यास करते हैं। उस्तादों का कहना है कि अखाड़े में प्रवेश करने वाले हर शिष्य के लिए सबसे पहला नियम ब्रह्मचर्य, दूसरा गुरु-शिष्य परंपरा का पालन, तीसरा नियमित अभ्यास और चौथा शुद्ध देसी खानपान है। इन नियमों का पालन करने वाला ही एक सफल पहलवान बन सकता है।
अखाड़े में केवल शरीर ही नहीं, बल्कि मन और चरित्र को भी मजबूत बनाया जाता है। पहलवानों को समय पर उठना, नियमित व्यायाम करना, अनुशासित जीवन जीना और गुरु के निर्देशों का पालन करना सिखाया जाता है। यही परंपरा वर्षों से भारतीय कुश्ती की पहचान रही है।
अक्सर लोगों का मानना है कि पहलवानी में भविष्य नहीं है, लेकिन यह धारणा पूरी तरह गलत है। आज कई पहलवान खेलों के माध्यम से पुलिस, सेना और अन्य सरकारी सेवाओं में उच्च पदों तक पहुंचे हैं। इसका प्रमुख उदाहरण उत्तर प्रदेश पुलिस के एएसपी अनुज चौधरी हैं, जिन्होंने पहलवानी से पहचान बनाई और बाद में प्रशासनिक सेवा में भी सफलता हासिल की।
गोपाल आश्रम भी प्रतिभाओं की ऐसी ही पाठशाला है। यहां से कई पहलवान हिंद केसरी, ब्रज केसरी और अन्य प्रतिष्ठित कुश्ती प्रतियोगिताओं में खिताब जीतकर मथुरा और ब्रज का नाम देशभर में रोशन कर चुके हैं।
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