पिता को घर से निकालने की खबरों पर बोले बेटे - अपने कर रहे बदनाम

  • 1 day ago
  • 317 views

मथुरा की पॉश कॉलोनी राधा ऑर्चिड के करोड़ो के मकान में रहने वाले जिन बेटों पर अपने कैंसर पीड़ित पिता को घर से निकालकर बगीची में बेसहारा छोड़ने का आरोप लग था,आज उन्हीं बेटों ने कैमरे के सामने आकर सच्चाई का दूसरा पहलू रखा है। 

फिल्म बागबान का वो सीन तो आपको याद होगा, जहाँ बच्चे अपने माता-पिता को बोझ समझकर बाँट लेते हैं। मथुरा के ब्रजेश और महेश गर्ग पर भी कुछ ऐसे ही आरोप लगे। आरोप था कि उन्होंने अपने कैंसर पीड़ित पिता सत्य प्रकाश और मां सरिता गर्ग को घर से निकालकर एक बगीची में बेसहारा छोड़ दिया। लेकिन अब इन बेटों ने चुप्पी तोड़ी है और जो सच सामने रखा है, वो रिश्तों की कड़वाहट और धोखाधड़ी की एक नई कहानी बयां कर रहा है।

बेटों का दावा हे कि पिता को कभी घर से नहीं निकाला, वे अपनी मर्जी से अलग रह रहे थे और मां बाप की सेवा के लिए चाचा कैलाश चंद्र को हर महीने दिए 12 हजार रुपये दिए जाते थे इतना ही नहीं इलाज के नाम पर लाखों रुपये लिए गए, आरोप हे कि पैसे पिता तक नहीं पहुंचे और रिश्ते के चाचा ने रुपए हड़प लिए माँ के निधन के बाद भी 6,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक मदद जारी रही।

बेटों ने कहा कि हम विलेन नहीं हैं। हमने चाचा को लाखों रुपए दिए ताकि पिता की सेवा हो सके, लेकिन उन्होंने पैसे हड़प लिए और पिता को बगीची में डाल दिया। जब हमने हिसाब माँगा, तो हमें समाज से बहिष्कृत करने की धमकी दी गई।बेटों का कहना है कि उन्हें  सोशल मीडिया पर बदनाम किया जा रहा है। पिता को सहारा देने पर बृजेश गर्ग और महेश गर्ग ने समाजसेवी तरुण शर्मा की सराहना की और कहा कि वह अपने पिता को अस्पताल में खून भी देकर आए हैं जबकि उन्हें बदनाम करने वाले खुद हॉस्पिटल नहीं पहुंचे।

मथुरा का यह मामला अब एक पेचीदा मोड़ ले चुका है। एक तरफ बेसहारा पिता की बेबसी है, तो दूसरी तरफ बेटों के वो सबूत जो उन्हें बेगुनाह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। सच क्या है, यह तो जाँच के बाद ही साफ होगा, लेकिन इस घटना ने आधुनिक समाज में रिश्तों और भरोसे के बीच की दरार को सार्वजनिक कर दिया है।

YouTube चैनल को Subscribe करें

ताज़ा खबरों और वीडियो अपडेट के लिए अभी जुड़ें

Subscribe Now