484 विकास परियोजनाओं की समीक्षा: डीएम चंद्र प्रकाश सिंह बोले— गुणवत्ता से समझौता नहीं, लापरवाह...
- 8h ago
वृंदावन। स्नेह बिहारी मंदिर में आयोजित अखिल भारतीय स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन में शास्त्रीय संगीत, कथक नृत्य और वाद्य प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं व संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात तक चले इस सांगीतिक आयोजन में भक्ति और कला का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि महंत माधव दास मोनी बाबा एवं एमएलसी चौधरी ऋषिपाल सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। वक्ताओं ने स्वामी हरिदास जी को भारतीय शास्त्रीय संगीत और भक्ति परंपरा का महान साधक बताते हुए उनकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।
सांगीतिक सत्र की शुरुआत पंडित कामोद मिश्र के ध्रुपद गायन से हुई। उन्होंने स्वामी हरिदास जी के पदों की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर पूरे परिसर को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। इसके बाद कथक नृत्यांगना मीनाक्षी कामथ ने श्रीकृष्ण लीलाओं का सजीव नृत्य रूपांतरण प्रस्तुत किया।
वाद्यवृंद में हरिमोहन शर्मा के पखावज वादन तथा तबला-घटम की जुगलबंदी ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण पद्मश्री शोभना नारायण का कथक नृत्य रहा, जिसमें उन्होंने राधा-कृष्ण की लीलाओं और भाव-अभिनय का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
सम्मेलन के अंत में संस्था के अध्यक्ष करन कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने का सतत प्रयास है। समापन अवसर पर सभी सहभागी कलाकारों को ‘स्वामी हरिदास संगीत कला रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
वृंदावन। स्नेह बिहारी मंदिर में आयोजित अखिल भारतीय स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन में शास्त्रीय संगीत, कथक नृत्य और वाद्य प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं व संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात तक चले इस सांगीतिक आयोजन में भक्ति और कला का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि महंत माधव दास मोनी बाबा एवं एमएलसी चौधरी ऋषिपाल सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। वक्ताओं ने स्वामी हरिदास जी को भारतीय शास्त्रीय संगीत और भक्ति परंपरा का महान साधक बताते हुए उनकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया। सांगीतिक सत्र की शुरुआत पंडित कामोद मिश्र के ध्रुपद गायन से हुई। उन्होंने स्वामी हरिदास जी के पदों की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर पूरे परिसर को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। इसके बाद कथक नृत्यांगना मीनाक्षी कामथ ने श्रीकृष्ण लीलाओं का सजीव नृत्य रूपांतरण प्रस्तुत किया। वाद्यवृंद में हरिमोहन शर्मा के पखावज वादन तथा तबला-घटम की जुगलबंदी ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण पद्मश्री शोभना नारायण का कथक नृत्य रहा, जिसमें उन्होंने राधा-कृष्ण की लीलाओं और भाव-अभिनय का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। सम्मेलन के अंत में संस्था के अध्यक्ष करन कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने का सतत प्रयास है। समापन अवसर पर सभी सहभागी कलाकारों को ‘स्वामी हरिदास संगीत कला रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
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