राधा अष्टमी पर बरसाना में 20 लाख श्रद्धालुओं की तैयारी, 7 ज़ोन और 20 सेक्टर...
- 12h ago
मथुरा स्थित संस्कृति विश्वविद्यालय के ब्लॉक-जी स्थित सेमिनार हॉल में प्रोफेसरों और संकाय सदस्यों के लिए 'इंक्लूजन लर्निंग' (समावेशी शिक्षा) विषय पर एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विजन दिव्यांग फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. मुकेश गुप्ता रहे। उन्होंने अपने संबोधन में एक ऐसा शैक्षणिक माहौल तैयार करने पर जोर दिया जहां शारीरिक क्षमता, सीखने की शैली या सामाजिक पृष्ठभूमि से परे हर छात्र को सीखने और आगे बढ़ने के समान अवसर मिल सकें।
डॉ. मुकेश गुप्ता ने कहा कि समावेशी शिक्षा की शुरुआत शिक्षकों की समावेशी सोच से ही होती है। उन्होंने फैकल्टी सदस्यों को आत्म-प्रेरणा, अपने विषय ज्ञान को अपडेट करने और नवाचार अपनाने की सलाह दी। उन्होंने रेखांकित किया कि पढ़ाना केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न होकर छात्रों के ज्ञान, कौशल, मूल्यों और समग्र व्यक्तित्व विकास के उद्देश्य से होना चाहिए। कार्यक्रम में सहानुभूति, धैर्य, ईमानदारी, समय पाबंदी और अनुकूलनशीलता जैसे प्रभावी शिक्षक के गुणों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ एकेडमिक्स डीन डॉ. रेनू गुप्ता के स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने समावेश और संवेदनशीलता के महत्व को रेखांकित किया। इसके बाद स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स के डीन डॉ. गंगाधर हुगार ने डॉ. मुकेश गुप्ता को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए विश्वविद्यालय की ओर से सम्मानित किया। अंत में विश्वविद्यालय में समानता, गरिमा और समावेश की संस्कृति को बढ़ावा देने के आह्वान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
मथुरा स्थित संस्कृति विश्वविद्यालय के ब्लॉक-जी स्थित सेमिनार हॉल में प्रोफेसरों और संकाय सदस्यों के लिए 'इंक्लूजन लर्निंग' (समावेशी शिक्षा) विषय पर एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विजन दिव्यांग फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. मुकेश गुप्ता रहे। उन्होंने अपने संबोधन में एक ऐसा शैक्षणिक माहौल तैयार करने पर जोर दिया जहां शारीरिक क्षमता, सीखने की शैली या सामाजिक पृष्ठभूमि से परे हर छात्र को सीखने और आगे बढ़ने के समान अवसर मिल सकें।डॉ. मुकेश गुप्ता ने कहा कि समावेशी शिक्षा की शुरुआत शिक्षकों की समावेशी सोच से ही होती है। उन्होंने फैकल्टी सदस्यों को आत्म-प्रेरणा, अपने विषय ज्ञान को अपडेट करने और नवाचार अपनाने की सलाह दी। उन्होंने रेखांकित किया कि पढ़ाना केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न होकर छात्रों के ज्ञान, कौशल, मूल्यों और समग्र व्यक्तित्व विकास के उद्देश्य से होना चाहिए। कार्यक्रम में सहानुभूति, धैर्य, ईमानदारी, समय पाबंदी और अनुकूलनशीलता जैसे प्रभावी शिक्षक के गुणों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।कार्यक्रम का शुभारंभ एकेडमिक्स डीन डॉ. रेनू गुप्ता के स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने समावेश और संवेदनशीलता के महत्व को रेखांकित किया। इसके बाद स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स के डीन डॉ. गंगाधर हुगार ने डॉ. मुकेश गुप्ता को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए विश्वविद्यालय की ओर से सम्मानित किया। अंत में विश्वविद्यालय में समानता, गरिमा और समावेश की संस्कृति को बढ़ावा देने के आह्वान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
ब्रेकिंग न्यूज़, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट और ताज़ा वीडियो सबसे पहले पाएं
ब्रेकिंग न्यूज़, वायरल वीडियो और हर बड़ी अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर
Link copied successfully!