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ब्रज की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में राज्य पुरातत्व विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। यमुना किनारे स्थित द्वापरकालीन कंस किला अब नए स्वरूप में नजर आएगा। राज्य पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने कंस किला को संरक्षित कर उसे प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने भी इसकी घोषणा की है।
लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहे कंस किला की दीवारें और बुर्ज समय के साथ जर्जर हो चुके हैं। अब संरक्षण कार्य के तहत किले की नींव को मजबूत किया जाएगा और इसकी प्राचीन वास्तुकला को सुरक्षित रखते हुए मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।
परियोजना के अंतर्गत किले में आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, पर्यटकों के लिए पैदल पथ और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके बाद कंस किला मथुरा आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनेगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और विश्राम घाट के साथ अब कंस किला भी पर्यटन सर्किट का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार किले की हालत लंबे समय से खराब बनी हुई थी। हालांकि कुछ हिस्सों में मरम्मत कार्य कराया गया है और वहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक शाखा भी लगाते हैं, लेकिन अभी भी बड़े स्तर पर संरक्षण की आवश्यकता है।
दीर्घ विष्णु मंदिर के प्रवक्ता रामदास चतुर्वेदी ने बताया कि कंस किला द्वापरकालीन इतिहास का साक्षी है। मान्यता है कि यहां कभी राजा कंस का दरबार लगता था। किले परिसर में भैरोनाथ और काल भैरव मंदिर भी स्थित हैं। इसके अलावा कंस किला के आसपास चिंताहरण और बैकुंठनाथ महादेव मंदिर भी मौजूद हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
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