7 दिन बाद मिला आखिरी शव: केसी घाट हादसे में 16 मौतें, आखिर जिम्मेदार कौन?

वृंदावन के केसी घाट पर पिछले शुक्रवार हुए दर्दनाक नाव हादसे का सातवें दिन आखिरकार दुखद समापन हुआ, जब लापता आखिरी व्यक्ति पंकज मल्होत्रा का शव घटनास्थल से करीब ढाई किलोमीटर दूर बरामद किया गया। इस हादसे में मरने वालों की संख्या अब 16 हो चुकी है।

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के जीवन को हमेशा के लिए बदल देने वाला त्रासदी बन गया। पंकज मल्होत्रा अपने परिवार के साथ दर्शन करने आए थे, लेकिन यह यात्रा उनकी आखिरी साबित हुई। इस हादसे में उनके परिवार के 6 लोगों की जान चली गई, जबकि पीछे उनका 9 साल का बेटा और 3 साल की मासूम बेटी रह गए हैं।

दर्द की ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती। हरियाणा की मोनिका टंडन, जिनकी शादी को महज 4 महीने हुए थे, अपने पति के साथ ऑस्ट्रेलिया में नई जिंदगी शुरू करने की तैयारी कर रही थीं। वीजा तक लग चुका था, लेकिन एक हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया। वहीं अबोहर के माणिक टंडन, जिनकी शादी 12 सितंबर को होनी थी, उनकी खुशियां भी यमुना की लहरों में समा गईं।

परिवार के सदस्य अनिकेत खन्ना के अनुसार, इस हादसे में पंकज मल्होत्रा समेत उनके परिवार के कई लोगों—कविता बहल, चरनजीत, मधुर बहल, पिंकी बहल और माणिक टंडन—की जान चली गई, जिससे पूरा परिवार गहरे शोक में डूबा है।

हादसे से बचे एक चश्मदीद ने नाविक की गंभीर लापरवाही उजागर की है। उसके अनुसार, करीब 40 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं के बावजूद नाविक ने यात्रियों की चेतावनी को नजरअंदाज किया और नाव को नहीं रोका। नतीजतन नाव पुल के खंभे से टकराकर पलट गई।

अब सवाल उठ रहा है—क्या यह महज एक हादसा था या लापरवाही का नतीजा? 16 मौतें, उजड़ते परिवार और पीछे छूट गए मासूम बच्चों की आंखों के आंसू यही पूछ रहे हैं कि आखिर इस त्रासदी का जिम्मेदार कौन है।