दूरबीन से ऑपरेशन के बाद बिगड़ी तबीयत, दूसरे ऑपरेशन के बाद गई महिला की जान...
- 11h ago
मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा से सामने आई तस्वीरों ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना हाईवे क्षेत्र के वार्ड नंबर-11 स्थित गांव मुडेशी में जलभराव और बदहाल रास्तों के कारण एक मृतक की अंतिम यात्रा घुटनों तक भरे पानी के बीच से निकालनी पड़ी। इतना ही नहीं, श्मशान घाट पर बारिश के बीच तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, गांव निवासी 40 वर्षीय अमर सिंह का असमय निधन हो गया। अंतिम यात्रा के दौरान गांव की गलियां जलमग्न होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को अर्थी को घुटनों तक भरे पानी और कीचड़ से होकर ले जाना पड़ा। लगातार बारिश के चलते श्मशान घाट पर भी अंतिम संस्कार के लिए तिरपाल का सहारा लेना पड़ा।
परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद हालात नहीं बदले। ग्रामीणों ने कहा, "जीते जी रास्ते नहीं मिलते और मरने के बाद अंतिम संस्कार के लिए सूखी जगह भी नसीब नहीं होती।"
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं हुआ है। करीब एक वर्ष पहले भी इसी गांव में एक महिला के अंतिम संस्कार के दौरान ऐसी ही तस्वीरें सामने आई थीं, जब बारिश के बीच तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा था। उस समय भी प्रशासन ने व्यवस्था सुधारने के दावे किए थे, लेकिन एक साल बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
अब अमर सिंह के अंतिम संस्कार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद एक बार फिर गांव में जलनिकासी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा से सामने आई तस्वीरों ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना हाईवे क्षेत्र के वार्ड नंबर-11 स्थित गांव मुडेशी में जलभराव और बदहाल रास्तों के कारण एक मृतक की अंतिम यात्रा घुटनों तक भरे पानी के बीच से निकालनी पड़ी। इतना ही नहीं, श्मशान घाट पर बारिश के बीच तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी 40 वर्षीय अमर सिंह का असमय निधन हो गया। अंतिम यात्रा के दौरान गांव की गलियां जलमग्न होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को अर्थी को घुटनों तक भरे पानी और कीचड़ से होकर ले जाना पड़ा। लगातार बारिश के चलते श्मशान घाट पर भी अंतिम संस्कार के लिए तिरपाल का सहारा लेना पड़ा। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद हालात नहीं बदले। ग्रामीणों ने कहा, "जीते जी रास्ते नहीं मिलते और मरने के बाद अंतिम संस्कार के लिए सूखी जगह भी नसीब नहीं होती।" ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं हुआ है। करीब एक वर्ष पहले भी इसी गांव में एक महिला के अंतिम संस्कार के दौरान ऐसी ही तस्वीरें सामने आई थीं, जब बारिश के बीच तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा था। उस समय भी प्रशासन ने व्यवस्था सुधारने के दावे किए थे, लेकिन एक साल बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। अब अमर सिंह के अंतिम संस्कार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद एक बार फिर गांव में जलनिकासी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
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