कोतवाली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 1.10 लाख रुपये और चोरी के कपड़ों के साथ आरोपी...
- 13h ago
आगरा। रेलवे पार्सल के जरिए फर्जी दस्तावेजों के सहारे GST चोरी करने के मामले में विजिलेंस जांच के बाद बड़ी कार्रवाई हुई है। जांच में करीब 42 लाख रुपये के माल को महज 2 लाख रुपये का दर्शाकर दूसरे राज्यों में भेजे जाने का मामला सामने आया है।
मामले में तत्कालीन सहायक आयुक्त वाणिज्यकर संदीप कुमार सिंह, वाणिज्य कर अधिकारी देवेश पांडेय, सतीश चंद्र और ट्रांसपोर्टर असलम कुरैशी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया गया है। विजिलेंस की जांच के बाद शासन से अनुमति मिलने पर यह कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में शासन को शिकायत मिली थी कि आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन से रेलवे पार्सल बोगी के माध्यम से फर्जी प्रपत्रों के आधार पर माल भेजकर GST की चोरी की जा रही है। शिकायत के बाद मामले की विजिलेंस जांच शुरू हुई।
जांच में सामने आया कि 29 सितंबर और 7 अक्टूबर 2022 को अवध एक्सप्रेस की पार्सल बोगी में माल लोड किया गया था। आरोप है कि संबंधित GST अधिकारियों को इसकी जानकारी दिए जाने के बावजूद मौके पर पहुंचने के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया कि पार्सल के दस्तावेजों में माल की कीमत 2 लाख रुपये दिखाई गई, जबकि जांच में उसका वास्तविक मूल्य करीब 42 लाख रुपये पाया गया। आरोप है कि अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टर को लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर चेकिंग नहीं की।
जांच के दौरान रेलवे स्टेशन पर लगी स्कैनिंग मशीन के इस्तेमाल में भी अनियमितता सामने आई। आरोप है कि कई पार्सलों की वास्तविक स्कैनिंग किए बिना ही फर्जी स्कैनिंग दर्शाकर माल भेजा गया, जिससे रेलवे को भी राजस्व का नुकसान हुआ।
विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक मामले की विवेचना जारी है। जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
आगरा। रेलवे पार्सल के जरिए फर्जी दस्तावेजों के सहारे GST चोरी करने के मामले में विजिलेंस जांच के बाद बड़ी कार्रवाई हुई है। जांच में करीब 42 लाख रुपये के माल को महज 2 लाख रुपये का दर्शाकर दूसरे राज्यों में भेजे जाने का मामला सामने आया है। मामले में तत्कालीन सहायक आयुक्त वाणिज्यकर संदीप कुमार सिंह, वाणिज्य कर अधिकारी देवेश पांडेय, सतीश चंद्र और ट्रांसपोर्टर असलम कुरैशी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया गया है। विजिलेंस की जांच के बाद शासन से अनुमति मिलने पर यह कार्रवाई की गई। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में शासन को शिकायत मिली थी कि आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन से रेलवे पार्सल बोगी के माध्यम से फर्जी प्रपत्रों के आधार पर माल भेजकर GST की चोरी की जा रही है। शिकायत के बाद मामले की विजिलेंस जांच शुरू हुई। जांच में सामने आया कि 29 सितंबर और 7 अक्टूबर 2022 को अवध एक्सप्रेस की पार्सल बोगी में माल लोड किया गया था। आरोप है कि संबंधित GST अधिकारियों को इसकी जानकारी दिए जाने के बावजूद मौके पर पहुंचने के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया कि पार्सल के दस्तावेजों में माल की कीमत 2 लाख रुपये दिखाई गई, जबकि जांच में उसका वास्तविक मूल्य करीब 42 लाख रुपये पाया गया। आरोप है कि अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टर को लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर चेकिंग नहीं की। जांच के दौरान रेलवे स्टेशन पर लगी स्कैनिंग मशीन के इस्तेमाल में भी अनियमितता सामने आई। आरोप है कि कई पार्सलों की वास्तविक स्कैनिंग किए बिना ही फर्जी स्कैनिंग दर्शाकर माल भेजा गया, जिससे रेलवे को भी राजस्व का नुकसान हुआ। विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक मामले की विवेचना जारी है। जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
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