संरक्षित वन भूमि पर चला वन विभाग का बुलडोजर, अवैध बैनर-पोस्टर हटाए; कार्रवाई जारी रहने...
- 10h ago
वृंदावन की धर्म नगरी स्थित पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग पर बने ललित कुंज आश्रम, राधा किशोरी सेवा धाम, चैतन्य कुटी एवं चरणाश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सनातन संस्कृति की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम दृश्य देखने को मिला। सुबह से ही आश्रम परिसर में देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं और शिष्यों का तांता लगा रहा। पूरा परिसर भक्ति, वैदिक मंत्रोच्चार और जयघोष से गूंज उठा।
महोत्सव के दौरान हरिदासीय संप्रदाय के शीर्ष संत एवं आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी राधा प्रसाद देव जू महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी इन्द्रदेव सरस्वती महाराज तथा फूलडोल महाराज के सानिध्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। सुबह की आरती के बाद शिष्यों ने वैदिक विधि-विधान के साथ अपने गुरुदेव का पूजन-अर्चन किया। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव को पुष्पमालाएं अर्पित कीं, अंगवस्त्र भेंट किए, चंदन का तिलक लगाया और आरती उतारकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के चरणों में फल, मिष्ठान एवं प्रसाद अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस दौरान पूरा आश्रम "गुरुदेव की जय" और हरिदासीय संप्रदाय के जयघोष से गूंजता रहा। गुरुदेव ने भी सभी शिष्यों को सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और भक्ति मार्ग पर अग्रसर रहने का आशीर्वाद दिया।
इस अवसर पर ललित कुंज आश्रम के महंत मोहिनी बिहारी शरण महाराज ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म में गुरु का स्थान भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। गुरु ही वह मार्गदर्शक हैं जो मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में भी गुरु-शिष्य परंपरा समाज को संस्कार, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का कार्य कर रही है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
वृंदावन की धर्म नगरी स्थित पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग पर बने ललित कुंज आश्रम, राधा किशोरी सेवा धाम, चैतन्य कुटी एवं चरणाश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सनातन संस्कृति की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम दृश्य देखने को मिला। सुबह से ही आश्रम परिसर में देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं और शिष्यों का तांता लगा रहा। पूरा परिसर भक्ति, वैदिक मंत्रोच्चार और जयघोष से गूंज उठा। महोत्सव के दौरान हरिदासीय संप्रदाय के शीर्ष संत एवं आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी राधा प्रसाद देव जू महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी इन्द्रदेव सरस्वती महाराज तथा फूलडोल महाराज के सानिध्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। सुबह की आरती के बाद शिष्यों ने वैदिक विधि-विधान के साथ अपने गुरुदेव का पूजन-अर्चन किया। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव को पुष्पमालाएं अर्पित कीं, अंगवस्त्र भेंट किए, चंदन का तिलक लगाया और आरती उतारकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के चरणों में फल, मिष्ठान एवं प्रसाद अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस दौरान पूरा आश्रम "गुरुदेव की जय" और हरिदासीय संप्रदाय के जयघोष से गूंजता रहा। गुरुदेव ने भी सभी शिष्यों को सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और भक्ति मार्ग पर अग्रसर रहने का आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर ललित कुंज आश्रम के महंत मोहिनी बिहारी शरण महाराज ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म में गुरु का स्थान भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। गुरु ही वह मार्गदर्शक हैं जो मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में भी गुरु-शिष्य परंपरा समाज को संस्कार, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का कार्य कर रही है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
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