संरक्षित वन भूमि पर चला वन विभाग का बुलडोजर, अवैध बैनर-पोस्टर हटाए; कार्रवाई जारी रहने...
- 10h ago
अमेरिका में चीन से मिलने वाली फंडिंग को लेकर प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की जांच तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने विदेशी फंडिंग, खासकर चीन से जुड़े दान और छात्रवृत्ति कार्यक्रमों को लेकर कई विश्वविद्यालयों की पड़ताल शुरू की है। प्रशासन का कहना है कि यह जांच राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और अमेरिकी छात्रों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से की जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, जांच का प्रमुख केंद्र हार्वर्ड विश्वविद्यालय है। अमेरिकी न्याय विभाग यह पता लगा रहा है कि क्या चीन से जुड़े दानदाताओं द्वारा वित्तपोषित छात्रवृत्ति योजनाएं अमेरिकी छात्रों के साथ भेदभाव करती हैं या नहीं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि किसी विदेशी फंडिंग के कारण अमेरिकी नागरिकों को नुकसान पहुंचा है या नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो कार्रवाई की जा सकती है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि वह सभी लागू अमेरिकी कानूनों का पालन करता है और राष्ट्रीयता, नस्ल या मूल के आधार पर वित्तीय सहायता में अवैध भेदभाव नहीं करता। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेगा। वहीं चीन की ओर से कहा गया है कि अमेरिका-चीन के शैक्षणिक सहयोग को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन द्वारा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में विदेशी प्रभाव, पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। यदि जांच में किसी तरह का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ संघीय फंडिंग पर असर पड़ सकता है और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
अमेरिका में चीन से मिलने वाली फंडिंग को लेकर प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की जांच तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने विदेशी फंडिंग, खासकर चीन से जुड़े दान और छात्रवृत्ति कार्यक्रमों को लेकर कई विश्वविद्यालयों की पड़ताल शुरू की है। प्रशासन का कहना है कि यह जांच राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और अमेरिकी छात्रों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, जांच का प्रमुख केंद्र हार्वर्ड विश्वविद्यालय है। अमेरिकी न्याय विभाग यह पता लगा रहा है कि क्या चीन से जुड़े दानदाताओं द्वारा वित्तपोषित छात्रवृत्ति योजनाएं अमेरिकी छात्रों के साथ भेदभाव करती हैं या नहीं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि किसी विदेशी फंडिंग के कारण अमेरिकी नागरिकों को नुकसान पहुंचा है या नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो कार्रवाई की जा सकती है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि वह सभी लागू अमेरिकी कानूनों का पालन करता है और राष्ट्रीयता, नस्ल या मूल के आधार पर वित्तीय सहायता में अवैध भेदभाव नहीं करता। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेगा। वहीं चीन की ओर से कहा गया है कि अमेरिका-चीन के शैक्षणिक सहयोग को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन द्वारा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में विदेशी प्रभाव, पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। यदि जांच में किसी तरह का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ संघीय फंडिंग पर असर पड़ सकता है और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
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