सर्दियों में रेल पटरियों की हर दिन होगी निगरानी, संरक्षा निर्देशों का सख्ती से होगा...
- 29m ago
मथुरा: गिरिराज धाम में 65 वर्षीय सेवानिवृत्त सेना कैप्टन पूरन सिंह की अनोखी साधना श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। मथुरा के राया क्षेत्र के गांव नगोडा निवासी पूरन सिंह सिर के बल यानी शीर्षासन की मुद्रा में 21 किलोमीटर की गोवर्धन परिक्रमा कर रहे हैं। उनकी इस अनोखी साधना को देखने के लिए परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है।
30 साल तक की देश सेवा, अब भक्ति में समर्पित जीवन!
पूरन सिंह वर्ष 1982 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने करीब 30 वर्षों तक देश की सेवा की और वर्ष 2012 में सेवानिवृत्त हुए। सेना से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपना जीवन योग, साधना और भक्ति को समर्पित कर दिया।
शीर्षासन में 4 घंटे 2 मिनट का विश्व रिकॉर्ड!
पूरन सिंह ने 30 नवंबर 2023 को लगातार 4 घंटे 2 मिनट तक शीर्षासन करने का रिकॉर्ड बनाया था। इस उपलब्धि के लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। अब वह गिरिराज महाराज के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने के लिए सिर के बल 21 किलोमीटर की गोवर्धन परिक्रमा करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
आस्था, योग और समर्पण की अनोखी मिसाल!
65 वर्ष की उम्र में पूरन सिंह का यह प्रयास श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। उनकी साधना को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग परिक्रमा मार्ग पर पहुंच रहे हैं।
मथुरा: गिरिराज धाम में 65 वर्षीय सेवानिवृत्त सेना कैप्टन पूरन सिंह की अनोखी साधना श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। मथुरा के राया क्षेत्र के गांव नगोडा निवासी पूरन सिंह सिर के बल यानी शीर्षासन की मुद्रा में 21 किलोमीटर की गोवर्धन परिक्रमा कर रहे हैं। उनकी इस अनोखी साधना को देखने के लिए परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। 30 साल तक की देश सेवा, अब भक्ति में समर्पित जीवन! पूरन सिंह वर्ष 1982 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने करीब 30 वर्षों तक देश की सेवा की और वर्ष 2012 में सेवानिवृत्त हुए। सेना से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपना जीवन योग, साधना और भक्ति को समर्पित कर दिया। शीर्षासन में 4 घंटे 2 मिनट का विश्व रिकॉर्ड! पूरन सिंह ने 30 नवंबर 2023 को लगातार 4 घंटे 2 मिनट तक शीर्षासन करने का रिकॉर्ड बनाया था। इस उपलब्धि के लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। अब वह गिरिराज महाराज के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने के लिए सिर के बल 21 किलोमीटर की गोवर्धन परिक्रमा करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आस्था, योग और समर्पण की अनोखी मिसाल! 65 वर्ष की उम्र में पूरन सिंह का यह प्रयास श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। उनकी साधना को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग परिक्रमा मार्ग पर पहुंच रहे हैं।
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