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- 13h ago
मथुरा। मथुरा-वृंदावन नगर निगम के विकास कार्यों को लेकर अब उसके अपने ही जनप्रतिनिधि सवाल उठाने लगे हैं। वार्ड संख्या 65 के पार्षद संतोष पाठक ने अपने वार्ड में विकास कार्य नहीं होने का आरोप लगाते हुए नगर निगम कार्यालय के बाहर धरना दिया।
उमस भरी गर्मी के बीच धरने पर बैठे पार्षद संतोष पाठक ने कहा कि उनके वार्ड से संबंधित कई विकास कार्यों की फाइलें लंबे समय से नगर निगम कार्यालय में लंबित पड़ी हैं, लेकिन उन्हें जानबूझकर स्वीकृति नहीं दी जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने के बावजूद कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते वार्ड के विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं और स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पार्षद ने नगर निगम पर उनके वार्ड के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि जनहित से जुड़े मामलों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे जनता में नाराजगी बढ़ रही है।
इस दौरान संतोष पाठक ने नगर निगम की बोर्ड बैठक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बोर्ड बैठकों में पारदर्शिता बढ़ाने, जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने तथा विकास कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने की मांग की।
नगर निगम के खिलाफ उसके ही एक पार्षद का धरने पर बैठना निगम प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर रहा है। यह मामला न केवल वार्ड स्तर पर विकास कार्यों में हो रही देरी को उजागर करता है, बल्कि निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी की ओर भी संकेत देता है। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन पार्षद की मांगों पर क्या निर्णय लेता है और लंबित विकास कार्यों को कब तक मंजूरी मिलती है।
मथुरा। मथुरा-वृंदावन नगर निगम के विकास कार्यों को लेकर अब उसके अपने ही जनप्रतिनिधि सवाल उठाने लगे हैं। वार्ड संख्या 65 के पार्षद संतोष पाठक ने अपने वार्ड में विकास कार्य नहीं होने का आरोप लगाते हुए नगर निगम कार्यालय के बाहर धरना दिया। उमस भरी गर्मी के बीच धरने पर बैठे पार्षद संतोष पाठक ने कहा कि उनके वार्ड से संबंधित कई विकास कार्यों की फाइलें लंबे समय से नगर निगम कार्यालय में लंबित पड़ी हैं, लेकिन उन्हें जानबूझकर स्वीकृति नहीं दी जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने के बावजूद कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते वार्ड के विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं और स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पार्षद ने नगर निगम पर उनके वार्ड के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि जनहित से जुड़े मामलों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे जनता में नाराजगी बढ़ रही है। इस दौरान संतोष पाठक ने नगर निगम की बोर्ड बैठक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बोर्ड बैठकों में पारदर्शिता बढ़ाने, जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने तथा विकास कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने की मांग की। नगर निगम के खिलाफ उसके ही एक पार्षद का धरने पर बैठना निगम प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर रहा है। यह मामला न केवल वार्ड स्तर पर विकास कार्यों में हो रही देरी को उजागर करता है, बल्कि निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी की ओर भी संकेत देता है। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन पार्षद की मांगों पर क्या निर्णय लेता है और लंबित विकास कार्यों को कब तक मंजूरी मिलती है।
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