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आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर डिप्टी स्टेशन अधीक्षक और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कर्मियों के बीच हुए विवाद ने अब प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गंभीर रूप ले लिया है। मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए रेलवे प्रशासन ने जेएजी (जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड) स्तर की तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है। वहीं, प्राथमिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर चार आरपीएफ कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
बताया गया है कि 12 जुलाई को ट्रेन संख्या 20808 हीराकुंड एक्सप्रेस के आगरा कैंट स्टेशन पर निर्धारित ठहराव के दौरान डिप्टी स्टेशन अधीक्षक और आरपीएफ कर्मियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। विवाद का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। इसके बाद रेलवे प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी किए।
रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि गठित उच्चस्तरीय समिति पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच करेगी। समिति सभी संबंधित पक्षों के बयान, दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्यों, जिनमें सीसीटीवी फुटेज भी शामिल है, की जांच कर अपनी रिपोर्ट रेलवे प्रशासन को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना के विरोध में रेलवे कर्मचारियों ने गोवर्धन स्टेडियम में धरना-प्रदर्शन करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। इस बीच फतेहपुर सीकरी से सांसद राजकुमार चाहर भी आगरा कैंट स्टेशन पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली और आरपीएफ अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि रेलवे में अनुशासनहीनता और इस तरह की घटनाएं किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएंगी। सांसद ने सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच, निष्पक्ष जांच प्रक्रिया और दोषियों के खिलाफ विभागीय के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
फिलहाल रेलवे प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने तक सभी तथ्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाएगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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