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दीपावली का त्योहार खुशियों, उमंग, उत्साह और रोशनी का प्रतीक है। इस पावन पर्व पर जहां हर घर को दीपों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाने की तैयारियां चल रही हैं, वहीं बच्चों के हुनर को नई पहचान दिलाने और उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृष्णापुरम स्थित ग्रोइंग सोल किडुज, गुरुकुल में दीपोत्सव मेले का शुभारंभ किया गया। इस मेले में नन्हे बच्चों द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए सुंदर दीपक और दीपावली से जुड़ी आकर्षक सजावटी वस्तुएं लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
इस विशेष आयोजन की थीम 'नन्हे हाथों का हुनर, खुशियों के दीप' रखी गई है। मेले के माध्यम से बच्चों को न केवल अपनी कलात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है, बल्कि उन्हें अपनी मेहनत, कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच को लोगों तक पहुंचाने के लिए एक बेहतर मंच भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
आधारशिला निःशुल्क पाठशाला एवं परिदे फाउंडेशन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानना, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना और उनके जीवन में खुशियों की नई रोशनी भरना है। इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है। जरूरत केवल उस प्रतिभा को पहचानने, निखारने और उसे सही दिशा देने की है।
मेले में आधारशिला निःशुल्क पाठशाला के बच्चों द्वारा तैयार किए गए आकर्षक दीपक, दीपावली की सजावटी सामग्री और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुओं को प्रदर्शित किया जा रहा है। इन वस्तुओं को तैयार करने में बच्चों ने अपनी मेहनत, लगन और कल्पनाशीलता का परिचय दिया है। उनके छोटे-छोटे हाथों से तैयार की गई ये कलाकृतियां न केवल उनकी रचनात्मक क्षमता को दर्शाती हैं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सीखने की ललक को भी उजागर करती हैं।
दीपोत्सव मेले की खास बात यह है कि यहां बच्चों की कला को केवल प्रदर्शित ही नहीं किया जा रहा, बल्कि उनके प्रयासों को सम्मान देने और उन्हें प्रोत्साहित करने की भावना को भी प्राथमिकता दी गई है। इस प्रकार के आयोजन बच्चों को यह विश्वास दिलाते हैं कि उनकी मेहनत और प्रतिभा का महत्व है तथा समाज में उनके हुनर को पहचान मिल सकती है।
आयोजकों का मानना है कि बच्चों को छोटी उम्र से ही रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना उनके सर्वांगीण विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जब बच्चों को अपनी कल्पनाओं को साकार करने और अपनी बनाई वस्तुओं को दूसरों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है, तो उनके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही, उनमें मेहनत, धैर्य, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता जैसे गुणों का भी विकास होता है।
इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्य सोनिका शर्मा ने शहरवासियों से दीपोत्सव मेले में पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शहर के लोगों को इस आयोजन में शामिल होकर बच्चों द्वारा तैयार की गई वस्तुओं को देखना चाहिए और उनकी मेहनत की सराहना करनी चाहिए। लोगों की उपस्थिति और प्रोत्साहन से बच्चों का उत्साह बढ़ेगा तथा उन्हें अपनी प्रतिभा को और बेहतर बनाने की प्रेरणा मिलेगी।
प्रधानाचार्य सोनिका शर्मा ने कहा कि बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने और उनके भीतर छिपे हुनर को पहचान दिलाने के लिए समाज का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। कई बार हमारा छोटा-सा प्रयास भी किसी बच्चे के लिए बड़ी प्रेरणा बन जाता है। यदि हम बच्चों की मेहनत को सराहें और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें, तो वे भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दीपावली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह दूसरों के जीवन में भी प्रकाश फैलाने का संदेश देता है। ऐसे में बच्चों द्वारा तैयार की गई वस्तुओं को प्रोत्साहन देना और उनकी रचनात्मकता का सम्मान करना भी दीपावली की खुशियों को साझा करने का एक सुंदर माध्यम है।
दीपोत्सव मेले के माध्यम से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलने के साथ-साथ समाज को भी यह संदेश दिया जा रहा है कि बच्चों की शिक्षा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। आधारशिला निःशुल्क पाठशाला एवं परिदे फाउंडेशन की यह पहल इसी दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।
कुल मिलाकर, कृष्णापुरम स्थित ग्रोइंग सोल किडुज, गुरुकुल में आयोजित यह दीपोत्सव मेला दीपावली की खुशियों को बच्चों के हुनर और उनकी मुस्कान के साथ जोड़ने का एक अनूठा प्रयास है। नन्हे हाथों से तैयार किए गए दीपक जहां रोशनी फैलाने का संदेश दे रहे हैं, वहीं बच्चों की मेहनत और रचनात्मकता समाज को उनके सपनों को साकार करने में सहयोग देने की प्रेरणा भी दे रही है।
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