रंगदारी नहीं दी तो घर में घुसकर हमला! मां की चेन और पत्नी का मंगलसूत्र...
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आगरा में विजिलेंस जांच के दौरान एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक आरोपी को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था, लेकिन वह 11 साल बाद जीवित पाया गया।
मामला कोतवाली क्षेत्र के फव्वारा बाजार में नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा है। वर्ष 2006 में इस प्रकरण में विजिलेंस ने केस दर्ज कराया था। इस मामले में नूरी दरवाजा निवासी देवेंद्र अग्रवाल मुख्य आरोपी था।
आरोप है कि तत्कालीन विवेचक अभय सिंह ने बिना पुख्ता सबूत के देवेंद्र अग्रवाल को कागजों में मृत घोषित कर दिया था और वर्ष 2015 में शासन को उसकी मौत की झूठी रिपोर्ट भेज दी गई थी।
करीब दो साल पहले विजिलेंस की गोपनीय जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि देवेंद्र अग्रवाल वास्तव में जीवित है। इसके बाद पूरे मामले की दोबारा जांच शुरू की गई।
विजिलेंस ने इस गंभीर लापरवाही और फर्जी रिपोर्टिंग के मामले में तत्कालीन विवेचक अभय सिंह के खिलाफ धारा 166ए के तहत मामला दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि अभय सिंह वर्ष 2017 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
फिलहाल विजिलेंस ने जीवित पाए गए आरोपी देवेंद्र अग्रवाल के खिलाफ भी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है और पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
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