राधाकुंड में मध्यरात्रि स्नान की विशेष मान्यता, संतान सुख की कामना लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु...
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मथुरा के जिला अस्पताल से एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल के जेरियाट्रिक वार्ड में छत की सीलिंग भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त वार्ड में कोई मरीज भर्ती नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। गुरुवार सुबह जब वार्ड का ताला खोला गया, तो अंदर बेड के ऊपर सीलिंग का मलबा बिखरा पड़ा था। घटना के बाद अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों को बरामदे में बैठकर उपचार कराना पड़ा।
मामला मथुरा के महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल का है। जानकारी के मुताबिक, बीती रात अस्पताल के जेरियाट्रिक वार्ड की छत की सीलिंग अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। हादसे के समय वार्ड में कोई मरीज मौजूद नहीं था, जिससे जनहानि होने से बच गई।
गुरुवार सुबह जब अस्पताल के वार्ड नंबर 105 का ताला खोला गया और चिकित्सक मरीजों को देखने की तैयारी करने लगे, तो अंदर का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। वार्ड में रखे बेड के ऊपर सीलिंग का मलबा पड़ा हुआ था। गनीमत रही कि रात के समय वार्ड खाली था, वरना सीलिंग गिरने से मरीजों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।
हादसे के बाद अस्पताल में अपने नन्हे-मुन्ने बच्चों का उपचार कराने पहुंचे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वार्ड में उपचार की व्यवस्था प्रभावित होने के चलते मरीज बरामदे में बैठे नजर आए। चिकित्सकों ने भी बरामदे में बैठाकर ही मरीजों का उपचार किया।
वहीं, जब इस घटना के संबंध में जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि मध्यरात्रि में खिड़की के रास्ते बंदरों ने उत्पात मचाया था, जिसके कारण यह हादसा हुआ। हालांकि, सीलिंग गिरने की वास्तविक वजह की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
जिला अस्पताल में हुई इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गनीमत रही कि हादसे के वक्त वार्ड में कोई मरीज भर्ती नहीं था और एक बड़ा हादसा टल गया। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रशासन क्षतिग्रस्त सीलिंग की मरम्मत और अन्य वार्डों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।
मथुरा के जिला अस्पताल से एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल के जेरियाट्रिक वार्ड में छत की सीलिंग भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त वार्ड में कोई मरीज भर्ती नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। गुरुवार सुबह जब वार्ड का ताला खोला गया, तो अंदर बेड के ऊपर सीलिंग का मलबा बिखरा पड़ा था। घटना के बाद अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों को बरामदे में बैठकर उपचार कराना पड़ा। मामला मथुरा के महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल का है। जानकारी के मुताबिक, बीती रात अस्पताल के जेरियाट्रिक वार्ड की छत की सीलिंग अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। हादसे के समय वार्ड में कोई मरीज मौजूद नहीं था, जिससे जनहानि होने से बच गई। गुरुवार सुबह जब अस्पताल के वार्ड नंबर 105 का ताला खोला गया और चिकित्सक मरीजों को देखने की तैयारी करने लगे, तो अंदर का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। वार्ड में रखे बेड के ऊपर सीलिंग का मलबा पड़ा हुआ था। गनीमत रही कि रात के समय वार्ड खाली था, वरना सीलिंग गिरने से मरीजों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी। हादसे के बाद अस्पताल में अपने नन्हे-मुन्ने बच्चों का उपचार कराने पहुंचे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वार्ड में उपचार की व्यवस्था प्रभावित होने के चलते मरीज बरामदे में बैठे नजर आए। चिकित्सकों ने भी बरामदे में बैठाकर ही मरीजों का उपचार किया। वहीं, जब इस घटना के संबंध में जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि मध्यरात्रि में खिड़की के रास्ते बंदरों ने उत्पात मचाया था, जिसके कारण यह हादसा हुआ। हालांकि, सीलिंग गिरने की वास्तविक वजह की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी। जिला अस्पताल में हुई इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गनीमत रही कि हादसे के वक्त वार्ड में कोई मरीज भर्ती नहीं था और एक बड़ा हादसा टल गया। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रशासन क्षतिग्रस्त सीलिंग की मरम्मत और अन्य वार्डों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।
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