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अयोध्या साइबर क्राइम थाने के एक सब इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मियों को राजस्थान के सीकर में 2.80 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने की। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने एक साइबर फ्रॉड केस में आरोपी के भाई का नाम मुकदमे से हटाने के बदले 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में बातचीत के बाद सौदा 2.80 लाख रुपये में तय हुआ।
जानकारी के मुताबिक, मामला अयोध्या साइबर क्राइम थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 22/2024 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने ACB को बताया था कि उसके भाई का नाम केस से हटाने के बदले पुलिसकर्मियों की ओर से रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद 17 अगस्त को रिश्वत मांगने का सत्यापन कराया गया, जिसमें मांग की पुष्टि हुई।
इसके बाद सीकर ACB ने ट्रैप की योजना बनाई। मंगलवार को जब आरोपी पुलिसकर्मी रिश्वत की रकम लेने पहुंचे और कांस्टेबल सोहनलाल ने 2.80 लाख रुपये की रकम प्राप्त की, तभी ACB टीम ने कार्रवाई करते हुए मौके से चारों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार पुलिसकर्मियों में सब इंस्पेक्टर यशवंत सिंह, कांस्टेबल पवन त्रिपाठी, कांस्टेबल सोहनलाल और कांस्टेबल गौरव चारग शामिल हैं।
बताया गया है कि चारों पुलिसकर्मी अयोध्या साइबर क्राइम थाने में तैनात थे, जबकि रिश्वत लेने के लिए टीम राजस्थान के सीकर पहुंची थी। ACB ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद अयोध्या पुलिस महकमे में भी कार्रवाई हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अयोध्या के SSP ने गिरफ्तार चारों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।
इस कार्रवाई ने पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल ACB की जांच जारी है और गिरफ्तार पुलिसकर्मियों से पूछताछ की जा रही है।
अयोध्या साइबर क्राइम थाने के एक सब इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मियों को राजस्थान के सीकर में 2.80 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने की। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने एक साइबर फ्रॉड केस में आरोपी के भाई का नाम मुकदमे से हटाने के बदले 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में बातचीत के बाद सौदा 2.80 लाख रुपये में तय हुआ। जानकारी के मुताबिक, मामला अयोध्या साइबर क्राइम थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 22/2024 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने ACB को बताया था कि उसके भाई का नाम केस से हटाने के बदले पुलिसकर्मियों की ओर से रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद 17 अगस्त को रिश्वत मांगने का सत्यापन कराया गया, जिसमें मांग की पुष्टि हुई। इसके बाद सीकर ACB ने ट्रैप की योजना बनाई। मंगलवार को जब आरोपी पुलिसकर्मी रिश्वत की रकम लेने पहुंचे और कांस्टेबल सोहनलाल ने 2.80 लाख रुपये की रकम प्राप्त की, तभी ACB टीम ने कार्रवाई करते हुए मौके से चारों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार पुलिसकर्मियों में सब इंस्पेक्टर यशवंत सिंह, कांस्टेबल पवन त्रिपाठी, कांस्टेबल सोहनलाल और कांस्टेबल गौरव चारग शामिल हैं। बताया गया है कि चारों पुलिसकर्मी अयोध्या साइबर क्राइम थाने में तैनात थे, जबकि रिश्वत लेने के लिए टीम राजस्थान के सीकर पहुंची थी। ACB ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद अयोध्या पुलिस महकमे में भी कार्रवाई हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अयोध्या के SSP ने गिरफ्तार चारों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई ने पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल ACB की जांच जारी है और गिरफ्तार पुलिसकर्मियों से पूछताछ की जा रही है।
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