मां की हत्या करने वाले दोषी को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया ₹26 हजार का जुर्माना...
- 11h ago
उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नए सियासी समीकरण बनने के संकेत मिलने लगे हैं। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के हालिया बयान को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दिए गए केंद्रीय मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि किसी भी घटना में जवाबदेही तय होनी चाहिए और दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन काम करती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वर्तमान गृह मंत्री को गोली चलाने के आदेश के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, तो अतीत की घटनाओं में भी तथ्यों के आधार पर ही आरोप लगाए जाने चाहिए।
चंद्रशेखर आजाद के इस बयान को समाजवादी पार्टी के उस रुख के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें अखिलेश यादव लगातार जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग उठाते रहे हैं। उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में संभावित विपक्षी एकजुटता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि दोनों दलों के बीच किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चुनाव से पहले इस तरह के राजनीतिक संकेतों ने सत्ता और विपक्ष दोनों के रणनीतिकारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नए सियासी समीकरण बनने के संकेत मिलने लगे हैं। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के हालिया बयान को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दिए गए केंद्रीय मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि किसी भी घटना में जवाबदेही तय होनी चाहिए और दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन काम करती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वर्तमान गृह मंत्री को गोली चलाने के आदेश के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, तो अतीत की घटनाओं में भी तथ्यों के आधार पर ही आरोप लगाए जाने चाहिए। चंद्रशेखर आजाद के इस बयान को समाजवादी पार्टी के उस रुख के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें अखिलेश यादव लगातार जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग उठाते रहे हैं। उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में संभावित विपक्षी एकजुटता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि दोनों दलों के बीच किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चुनाव से पहले इस तरह के राजनीतिक संकेतों ने सत्ता और विपक्ष दोनों के रणनीतिकारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
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