छत्तीसगढ़ के दुर्ग पुलिस ने साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टे के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 1242 म्यूल बैंक खातों की पहचान करते हुए 122 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान करीब 3 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि भी फ्रीज कर दी गई है।
पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराधी लोगों को कमीशन, नौकरी या घर बैठे आसान कमाई का लालच देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। इन खातों में साइबर ठगी, फर्जी निवेश, डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड और ऑनलाइन सट्टे से हासिल रकम जमा की जाती थी। इसके बाद पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर असली स्रोत छिपाया जाता था।
दुर्ग पुलिस ने 1 जनवरी से 29 जुलाई 2026 तक विशेष अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस मुख्यालय की साइबर शाखा, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), विभिन्न राज्यों से मिली शिकायतों और बैंकों से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण किया गया। जांच में 18 मामलों से जुड़े 1242 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों का पता चला।
कार्रवाई के दौरान 117 म्यूल खाताधारकों और 5 म्यूल एजेंटों समेत कुल 122 लोगों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही लगभग 3 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि फ्रीज कर दी गई, ताकि उसे आगे ट्रांसफर न किया जा सके। पुलिस अब करीब 2000 अन्य संदिग्ध बैंक खातों की भी जांच कर रही है।
जांच में कुछ बैंक अधिकारियों और शाखा प्रबंधकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। पुलिस यह पता लगा रही है कि कहीं खाता खोलने की प्रक्रिया, केवाईसी सत्यापन और संदिग्ध लेन-देन की निगरानी में लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग पुलिस ने साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टे के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 1242 म्यूल बैंक खातों की पहचान करते हुए 122 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान करीब 3 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि भी फ्रीज कर दी गई है।
पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराधी लोगों को कमीशन, नौकरी या घर बैठे आसान कमाई का लालच देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। इन खातों में साइबर ठगी, फर्जी निवेश, डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड और ऑनलाइन सट्टे से हासिल रकम जमा की जाती थी। इसके बाद पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर असली स्रोत छिपाया जाता था।
दुर्ग पुलिस ने 1 जनवरी से 29 जुलाई 2026 तक विशेष अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस मुख्यालय की साइबर शाखा, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), विभिन्न राज्यों से मिली शिकायतों और बैंकों से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण किया गया। जांच में 18 मामलों से जुड़े 1242 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों का पता चला।
कार्रवाई के दौरान 117 म्यूल खाताधारकों और 5 म्यूल एजेंटों समेत कुल 122 लोगों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही लगभग 3 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि फ्रीज कर दी गई, ताकि उसे आगे ट्रांसफर न किया जा सके। पुलिस अब करीब 2000 अन्य संदिग्ध बैंक खातों की भी जांच कर रही है।
जांच में कुछ बैंक अधिकारियों और शाखा प्रबंधकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। पुलिस यह पता लगा रही है कि कहीं खाता खोलने की प्रक्रिया, केवाईसी सत्यापन और संदिग्ध लेन-देन की निगरानी में लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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