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- 11h ago
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाए जाने के मामले में Meta की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केंद्र सरकार के बुलावे पर बुधवार को कंपनी की ग्लोबल टीम ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। Meta के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने IT सचिव एस. कृष्णन और अन्य अधिकारियों से करीब 45 मिनट तक चर्चा की।
विवाद प्रधानमंत्री मोदी की उस फेसबुक पोस्ट को लेकर है, जिसमें उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी। इस पोस्ट को फेसबुक पर कुछ समय के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। बाद में पोस्ट को दोबारा बहाल कर दिया गया। Meta ने इसे तकनीकी/ऑटोमेटेड मॉडरेशन सिस्टम की गलती बताते हुए माफी मांगी थी, लेकिन IT मंत्रालय ने कंपनी के स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना।
बैठक के दौरान सरकार ने केवल प्रधानमंत्री की पोस्ट का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि Meta के प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSAM), एल्गोरिदमिक बायस, AI से तैयार सामग्री और कंटेंट मॉडरेशन जैसे विषयों पर भी जवाब मांगा। सरकार यह जानना चाहती है कि भविष्य में महत्वपूर्ण और सत्यापित अकाउंट्स की पोस्ट के साथ इस तरह की गलती दोबारा न हो, इसके लिए कंपनी क्या कदम उठा रही है।
इस बीच संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने भी मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग से तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। साथ ही माफी नहीं मांगने की स्थिति में कंपनी को भारत में मिलने वाली Section 79 की ‘Safe Harbour’ कानूनी सुरक्षा को लेकर कार्रवाई की सिफारिश की है। हालांकि समिति की सिफारिश अपने आप में अंतिम कानूनी फैसला नहीं है।
Meta ने सरकार को यह भी बताया है कि प्रधानमंत्री मोदी और अन्य प्रमुख अकाउंट्स की पोस्ट के लिए अतिरिक्त निगरानी और कई स्तर की जांच जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, ताकि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
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