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- 11h ago
कहते हैं सच्चा प्यार सरहदों और वक्त का मोहताज नहीं होता। उत्तराखंड के बागेश्वर से सामने आई एक ऐसी ही भावुक कर देने वाली कहानी ने लोगों का दिल छू लिया है। जापान की रहने वाली मियाको हजारों किलोमीटर का सफर तय कर उत्तराखंड पहुंचीं, ताकि अपने दिवंगत अमेरिकी पति रॉबर्ट की आखिरी इच्छा पूरी कर सकें।
रॉबर्ट का भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से गहरा लगाव था। उनकी इच्छा थी कि निधन के बाद उनकी अस्थियों का हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार पवित्र सरयू नदी में विसर्जन किया जाए। पति की इस इच्छा को वर्षों बाद भी मियाको भूली नहीं और आखिरकार वह उनकी अस्थियां लेकर बागेश्वर पहुंचीं।
बागेश्वर पहुंचने के बाद मियाको ने स्थानीय पुरोहितों की मदद से सरयू और गोमती नदियों के संगम पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की। इसके बाद पति रॉबर्ट की अस्थियों का सरयू नदी में विसर्जन किया गया।
इस दौरान घाट पर मौजूद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने मियाको की भावनाओं और उनके इस संकल्प का सम्मान किया। पति की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए जापान से भारत तक का यह सफर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
बताया गया कि रॉबर्ट का बागेश्वर और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से विशेष जुड़ाव था। बागनाथ धाम और सरयू नदी उनके लिए खास महत्व रखते थे। इसी वजह से उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा के तौर पर बागेश्वर में हिंदू परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन की इच्छा जताई थी।
मियाको ने पति की इस इच्छा को अपना वादा समझकर पूरा किया। रॉबर्ट की मौत के वर्षों बाद भी उनकी आखिरी इच्छा को याद रखना और उसे पूरा करने के लिए हजारों किलोमीटर दूर आना, पति-पत्नी के रिश्ते की गहराई को दिखाता है।
बागेश्वर में हुई यह भावुक घटना अब प्रेम, वचन और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के प्रति सम्मान की मिसाल बनकर सामने आई है।
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