धर्मनगरी मथुरा में ऋषि पंचमी के पावन अवसर पर द्वापर युग से भी प्राचीन माने जाने वाले सप्तऋषि टीले पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सैकड़ों महिलाओं ने सामूहिक रूप से वैदिक विधि-विधान के साथ हवन-पूजन कर ऋषि पंचमी का उद्यापन किया और सप्तऋषियों की विशेष आराधना की।
मथुरा स्थित ऐतिहासिक सप्तऋषि टीले पर सोमवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार हवन, पूजन और सप्तऋषियों का स्मरण करते हुए ऋषि पंचमी व्रत का उद्यापन किया।
सप्तऋषि मंदिर के सेवायत अमित शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार यह विश्व का एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां भगवान श्रीकृष्ण के अवतार के लिए सातों ऋषियों ने कंस के अत्याचारों से व्यथित होकर महायज्ञ किया था। यज्ञ की आहुतियों से बनी पवित्र भस्म से ही यह विशाल टीला निर्मित हुआ, जिसे आज सप्तऋषि टीला के नाम से जाना जाता है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि ऋषि पंचमी के दिन यहां सप्तऋषियों की पूजा-अर्चना और उद्यापन करने से परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की उन्नति और पापों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूरे मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन की सुगंध और भक्ति का वातावरण छाया रहा।