सेंट फ्रांसिस स्कूल के छात्रों ने चलाया स्वच्छता अभियान, नुक्कड़ नाटक से दिया स्वच्छता का...
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अवध बेल्ट की सियासत में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की नाराज़गी चर्चा में है, तो दूसरी ओर ओबीसी नेता और पूर्व एमएलसी हीरा ठाकुर ने बीजेपी छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया है। लगातार हो रहे इन घटनाक्रमों ने बीजेपी के सामाजिक समीकरण और अवध के चुनावी गणित पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अवध बेल्ट में लखनऊ, रायबरेली, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव और लखीमपुर खीरी जैसे जिले शामिल हैं। यही इलाका लंबे समय से बीजेपी की गैर-यादव पिछड़े और गैर-जाटव दलित सोशल इंजीनियरिंग का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर, जो पासी समाज के बड़े चेहरे माने जाते हैं, हाल के दिनों में पार्टी के भीतर खुद को दरकिनार किए जाने की बात कह चुके हैं। वहीं लखीमपुर खीरी के वरिष्ठ ओबीसी नेता और पूर्व एमएलसी हीरा ठाकुर ने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
इससे पहले हरदोई के पूर्व एमएलसी अवध कुमार सिंह ‘बागी’ भी कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। लगातार हो रहे इन राजनीतिक बदलावों को विपक्ष बीजेपी के लिए बड़ा झटका बता रहा है, जबकि बीजेपी का दावा है कि संगठन पूरी तरह मजबूत है और चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जाएगा।
2024 लोकसभा चुनाव में अवध क्षेत्र की कई सीटों पर सपा-कांग्रेस गठबंधन ने बढ़त बनाई थी। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इस क्षेत्र में जातीय और राजनीतिक समीकरण दोनों दलों के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं।
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