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Wednesday, 04 Nov 2026
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श्मशान घाट के विकास में 4 लाख का खेल! कागजों में काम पूरा, धरातल पर भ्रष्टाचार का आरोप

मथुरा में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित श्मशान भूमि भी कथित भ्रष्टाचार से अछूती नहीं रही। ग्रामसभा अगनपुरा में श्मशान भूमि के समतलीकरण के लिए करीब 4 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ, लेकिन आरोप है कि धरातल पर काम पूरा कराए बिना ही सरकारी धन का बंदरबांट कर लिया गया। ग्राम प्रधान और कार्यदायी संस्था के लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के बाद अब जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। आखिर क्या है पूरा मामला, देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट।

यह तस्वीर है मथुरा जनपद की सदर तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्रामसभा अगनपुरा की। यहां 9 अक्टूबर 2024 को श्मशान भूमि के समतलीकरण के लिए शासन की ओर से 3 लाख 99 हजार 814 रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। उद्देश्य था कि ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि विकास के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई।

शिकायतकर्ता नारायण सिंह कैन ने ग्राम प्रधान विक्रम सिंह और कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार लोगों पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मौके पर नियमानुसार समतलीकरण का कार्य नहीं कराया गया। केवल जेसीबी और डंपर चलाकर औपचारिकता पूरी की गई और बजट की धनराशि का दुरुपयोग कर लिया गया।

मामले को लेकर 21 नवंबर 2024 को फोटो और वीडियो साक्ष्यों के साथ उपजिलाधिकारी से शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद जांच के आदेश दिए गए और काम रुकवा दिया गया। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि आज तक समतलीकरण का काम पूरा नहीं हो पाया है। वहीं, श्मशान परिसर में बने जर्जर शेड भी बदहाल स्थिति में हैं, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं।

लंबे समय से कार्रवाई की मांग कर रहे शिकायतकर्ता ने अब एक बार फिर जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह से मामले की शिकायत की है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को जांच सौंपी है।

अब सवाल यह है कि श्मशान भूमि के विकास के लिए स्वीकृत करीब 4 लाख रुपये आखिर कहां खर्च हुए? क्या मौके पर कराए गए कार्यों और सरकारी अभिलेखों का मिलान होगा? क्या जांच में जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आएगी और सरकारी धन की रिकवरी के साथ दोषियों पर कार्रवाई होगी? फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं।

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