तमिलनाडु की राजनीति में इस समय थलापति विजय का नाम तूफान की तरह गूंज रहा है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम चुनावी रुझानों में 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाकर सत्ता के करीब पहुंच चुकी है। लेकिन इस ‘विजय पथ’ के पीछे संघर्ष, विवाद और निजी उथल-पुथल की लंबी कहानी छिपी है।
सत्ता तक पहुंचने की राह में विजय को कई बड़े विवादों का सामना करना पड़ा—चाहे वह प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग की जांच हो, या फिल्म जन नायकन को लेकर कानूनी अड़चनें। उनकी लोकप्रिय रैलियों में उमड़ी भीड़ कभी-कभी हादसों की वजह भी बनी, जिससे विपक्ष को उन पर निशाना साधने का मौका मिला।
निजी जिंदगी भी कम उथल-पुथल भरी नहीं रही। पत्नी संगीता सोरलिंगम से अलगाव की खबरें, एक्ट्रेस तृषा कृष्णन के साथ नाम जुड़ना और पिता एस.ए. चंद्रशेखर के साथ कानूनी विवाद—इन सबने उनकी छवि पर कई बार सवाल खड़े किए। यहां तक कि पारिवारिक तनाव के चलते उनके बेटे जेसन द्वारा सोशल मीडिया पर दूरी बनाना भी चर्चा में रहा।
इसके बावजूद विजय ने हर चुनौती को पार करते हुए खुद को एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया। यही वजह है कि आज जनता उन्हें सिर्फ एक फिल्म स्टार नहीं, बल्कि एक उभरते ‘जननायक’ के रूप में देख रही है।