वृंदावन (मथुरा): सप्त देवालयों में प्रमुख श्री राधा दामोदर मंदिर में आयोजित श्रील रूप गोस्वामी महाराज के त्रिदिवसीय तिरोभाव महोत्सव का सोमवार को धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ भव्य समापन हुआ। अंतिम दिवस पर संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने समाधि स्थल पर विशेष पूजन-अर्चन कर पुष्पांजलि अर्पित की तथा श्रील रूप गोस्वामी महाराज का भावपूर्ण स्मरण किया।
इसके उपरांत मंदिर परिसर में नगर के प्रमुख संतों, धर्माचार्यों, भागवताचार्यों एवं विद्वानों की विद्वत संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में वक्ताओं ने श्रील रूप गोस्वामी महाराज के व्यक्तित्व, कृतित्व और गौड़ीय वैष्णव भक्ति परंपरा में उनके अद्वितीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रख्यात विद्वान पं. बिहारी लाल वशिष्ठ ने अपने संबोधन में कहा कि “श्रील रूप गोस्वामी महाराज गौड़ीय संप्रदाय की अमूल्य निधि हैं।” उन्होंने उनके आध्यात्मिक जीवन, साधना, भक्ति साहित्य और श्रीराधा-कृष्ण भक्ति के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख किया।
संगोष्ठी के दौरान “श्री राधा दामोदर नित्य सेवा पद्धति” एवं “श्रीकृष्ण जन्मतिथि विधि” नामक दो महत्वपूर्ण ग्रंथों का भी विमोचन उपस्थित संतों एवं विद्वानों द्वारा किया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर हरिनाम संकीर्तन, वैदिक मंत्रोच्चारण और भक्ति रस से सराबोर रहा।
समापन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर श्रील रूप गोस्वामी महाराज के आदर्शों और भक्ति परंपरा को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।