श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर से भगवान बाबा महाकाल की पहली शाही सवारी पूरे धार्मिक वैभव और पारंपरिक गरिमा के साथ निकाली गई। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए सवारी मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। चारों तरफ गूंजते "जय श्री महाकाल" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से पूरी उज्जैन नगरी शिवमय नजर आई।
निर्धारित समय पर भगवान महाकाल पालकी में विराजमान होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण के लिए निकले। जैसे ही बाबा महाकाल की पालकी मंदिर परिसर से बाहर आई, श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया और जगह-जगह पुष्प वर्षा कर पालकी का स्वागत किया।
बाबा महाकाल की सवारी में धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। आदिवासी लोकनृत्य दल ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। पुलिस बैंड और महाकाल बैंड की भक्तिमय धुनों के बीच बाबा महाकाल की पालकी आगे बढ़ती रही। सवारी में शामिल आकर्षक धार्मिक झांकियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
बाबा महाकाल की पालकी निर्धारित मार्ग से होते हुए पटनी बाजार, गुदरी चौराहा और अन्य प्रमुख स्थानों से गुजरते हुए रामघाट पहुंची। पूरे रास्ते श्रद्धालु बाबा महाकाल की एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए।
रामघाट पहुंचने पर बाबा महाकाल का मां शिप्रा के पावन जल से अभिषेक किया गया। यहां विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल का विशेष पूजन-अर्चन हुआ। इस दौरान घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के जयकारे लगाए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
रामघाट पर पूजन के बाद बाबा महाकाल की शाही सवारी दानी गेट, ढाबा रोड, सत्यनारायण मंदिर और गोपाल मंदिर सहित निर्धारित मार्गों से आगे बढ़ी। सवारी जिस रास्ते से गुजरी, वहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का स्वागत और दर्शन किया।
नगर भ्रमण और विभिन्न धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के बाद बाबा महाकाल की पालकी पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। श्रावण के प्रथम सोमवार पर निकली बाबा महाकाल की पहली शाही सवारी ने उज्जैन में आस्था, भक्ति और सनातन परंपरा का भव्य दृश्य प्रस्तुत किया।