नई दिल्ली। दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में लाठी लिए पुलिसकर्मियों की मौजूदगी पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी. लोकुर ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की जवाबदेही और पहचान स्पष्ट होना बेहद जरूरी है।
पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि यदि पुलिसकर्मी बिना वर्दी के भीड़ नियंत्रण की कार्रवाई में शामिल होते हैं, तो इससे पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। उनका मानना है कि ऐसी स्थिति में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कार्रवाई करने वाला व्यक्ति वास्तव में पुलिसकर्मी है या नहीं।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल के दिनों में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने बैरिकेड तोड़ने, पथराव करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।
इस मुद्दे पर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती को लेकर भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ विशेषज्ञ इसे सुरक्षा और रणनीतिक आवश्यकता बताते हैं, जबकि अन्य इसे पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों के दृष्टिकोण से चिंताजनक मान रहे हैं।
नोट: मामले को लेकर विभिन्न पक्षों के अपने-अपने दावे हैं और इस पर सार्वजनिक एवं कानूनी स्तर पर चर्चा जारी है।