देहरादून में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और गाजियाबाद क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कथित नकली दवा निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया है। छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से बड़ी मात्रा में संदिग्ध दवाएं, पैकेजिंग सामग्री, रैपर, लेबल और दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में सिप्ला, ल्यूपिन, डॉ. रेड्डीज, सन फार्मा, मैनकाइंड, इंटास, एबॉट, मैक्लियोड्स और जाइडस समेत कई प्रतिष्ठित फार्मा कंपनियों के नाम और ब्रांड का कथित तौर पर इस्तेमाल कर नकली दवाएं तैयार की जा रही थीं। अधिकारियों के अनुसार, इन दवाओं की पैकिंग इतनी असली जैसी बनाई गई थी कि आम ग्राहक ही नहीं, मेडिकल स्टोर संचालक भी आसानी से धोखा खा सकते थे।
संयुक्त टीम ने मौके से बरामद सभी संदिग्ध दवाओं और सामग्री को सील कर दिया है। दवाओं के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें कौन-कौन से रसायनों का इस्तेमाल किया गया और ये स्वास्थ्य के लिए कितनी खतरनाक हैं।
जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि नकली दवाओं की सप्लाई किन-किन राज्यों और बाजारों तक की जा रही थी तथा इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। कुछ संदिग्धों से पूछताछ जारी है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाएं मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। ऐसे में लोगों को दवा हमेशा अधिकृत मेडिकल स्टोर से खरीदनी चाहिए और पैकेजिंग, बैच नंबर व एक्सपायरी डेट की जांच अवश्य करनी चाहिए। फिलहाल एजेंसियां पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।