मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर आदिवासी परिवारों का विरोध तेज हो गया है। प्रभावित ग्रामीण उचित मुआवजा, पुनर्वास और जमीन के सही सर्वे की मांग को लेकर अनोखे तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। कोई चिता पर लेटा है, तो कोई गले में फंदा डालकर और नदी में खड़े होकर विरोध जता रहा है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना को बुंदेलखंड के लिए महत्वाकांक्षी जल परियोजना माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन को बड़ा लाभ मिलेगा। लेकिन परियोजना से प्रभावित कई आदिवासी परिवारों का आरोप है कि उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही पुनर्वास की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
छतरपुर के कूपी गांव में पिछले कई दिनों से प्रभावित परिवार 'चिता सत्याग्रह' कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भूमि सर्वे में भारी गड़बड़ियां हुई हैं और कई पात्र परिवारों को मुआवजे की सूची से बाहर रखा गया है। वहीं कुछ महिलाएं बाराना नदी में पानी के बीच खड़े होकर जल सत्याग्रह भी कर रही थीं।
रविवार को प्रशासन और पुलिस ने प्रदर्शन स्थल खाली करा दिया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर, जो लंबे समय से अनशन पर थे, उन्हें अस्पताल भेज दिया गया। प्रशासन का कहना है कि बढ़ते जलस्तर और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया गया। साथ ही अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जिन परिवारों की शिकायतें हैं, उनकी दोबारा जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।