मथुरा में महज 20 मिनट की तेज बारिश ने नगर निगम मथुरा-वृंदावन के दावों और तैयारियों की पूरी तरह पोल खोल दी। शहर के सबसे व्यस्त भूतेश्वर अंडरपास में 10 से 15 फीट तक पानी भर गया, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। कई दोपहिया और चारपहिया वाहन पानी में फंस गए, जबकि राहगीरों और यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
बारिश रुकने के काफी देर बाद भी अंडरपास में जलभराव जस का तस बना रहा। पानी इतना अधिक था कि कई बाइक बीच रास्ते में बंद हो गईं, जबकि कार चालकों को अपने वाहनों को निकालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। देखते ही देखते सड़क तालाब में तब्दील हो गई और लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर बारिश में यही हालात बनते हैं, लेकिन स्थायी जल निकासी व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी। करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के दावों के बावजूद, पहली ही तेज बारिश ने व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इतने बड़े जलभराव के बावजूद मौके पर न तो नगर निगम का कोई जिम्मेदार अधिकारी दिखाई दिया और न ही प्रशासन का कोई कर्मचारी। सड़क पर सिर्फ परेशान आम जनता नजर आई, जो अपने खराब हुए वाहनों को धक्का लगाकर निकालने और एक-दूसरे की मदद करने में जुटी रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल निकासी की तत्काल व्यवस्था नहीं की गई, तो इस पानी को निकलने में 5 से 7 घंटे या उससे भी अधिक समय लग सकता है। सवाल यह है कि हर साल बरसात से पहले किए जाने वाले दावे आखिर कागजों तक ही क्यों सीमित रह जाते हैं? अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकाल पाते हैं।