मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम में मानवता और संवेदनशीलता की एक भावुक कर देने वाली मिसाल सामने आई। मुंबई के आयरोली निवासी 63 वर्षीय सतीश कामद दर्शन के लिए राम दरबार पहुंचे थे, जहां अचानक उन्हें हृदयाघात (हार्ट अटैक) आया और उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल में सुरक्षित रखवाया तथा परिजनों को तत्काल सूचना दी।
मुंबई से परिजनों के पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई और सागर रोड स्थित भैंसासुर मुक्ति धाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा के दौरान प्रधान आरक्षक रविंद्र मिश्रा और जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने कंधा देकर इंसानियत, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है।
मृतक की बेटी कृतिका कामद ने बताया कि उनके पिता की अंतिम इच्छा थी कि उनकी अंतिम सांस बागेश्वर धाम में निकले। वहीं पत्नी स्नेह कामद ने कहा कि सतीश कामद का धाम से गहरा जुड़ाव था और वे यहां होने वाले सेवा कार्यों में भी सक्रिय रूप से भाग लेते थे। उनकी इच्छा उसी पवित्र धाम में पूरी हुई, जिससे परिवार भावुक हो गया।
यह घटना न केवल जीवन की अनिश्चितता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कठिन परिस्थितियों में पुलिस, प्रशासन और आम लोग किस तरह मानवता का परिचय देकर दुख की घड़ी में परिवार का सहारा बन सकते हैं।