मथुरा के मांट थाना क्षेत्र में बिजली विभाग से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जहां 11 हजार वोल्ट की लाइन की चपेट में आने से एक संविदा कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गया। घायल कर्मचारी का मथुरा के सिम्स हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। परिवार ने बिजली विभाग पर सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराने और इलाज का खर्च उठाने से पीछे हटने के आरोप लगाए हैं। सुनवाई नहीं होने से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने बिजली घर पर धरना दिया। अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बातचीत के बाद एक लाख रुपये और जमा करने तथा इलाज जारी रखने पर सहमति बनी, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ।
मामला मांट थाना क्षेत्र के गांव जनकपुर का है। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी सत्येंद्र उर्फ भीमा पुत्र विजय सिंह बिजली घर पर संविदा कर्मचारी के रूप में हेल्पर का काम करता है। घटना 24 अक्टूबर की बताई जा रही है। बताया गया कि बिजली संबंधी कार्य के दौरान भोला नाम का कर्मचारी 11 हजार वोल्ट की लाइन के संपर्क में आ गया, जिससे वह बुरी तरह झुलस गया।
घटना के बाद घायल कर्मचारी को मथुरा के सिम्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
घायल के परिजनों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि कर्मचारी हेल्पर के पद पर कार्यरत था, इसके बावजूद उससे लाइनमैन का काम क्यों कराया जा रहा था। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्य के दौरान उसे जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
परिवार का कहना है कि हादसे के बाद इलाज के खर्च को लेकर भी समस्या सामने आई। आरोप है कि बिजली विभाग की ओर से पहले 50 हजार रुपये दिए गए, लेकिन बाद में अधिकारियों ने आगे की राशि देने में असमर्थता जताई। हालांकि, इन आरोपों पर विभाग का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
इलाज को लेकर विवाद बढ़ने पर सैकड़ों ग्रामीण बिजली घर पहुंच गए और धरने पर बैठकर अपना विरोध जताया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और राजनीतिक प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे।
राष्ट्रीय लोकदल के प्रेम सिंह दरोगा और यशपाल सिंह ने ग्रामीणों तथा बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत की। वार्ता के दौरान एक लाख रुपये और जमा कराने तथा घायल कर्मचारी का इलाज जारी रखने पर सहमति बनी। इसके बाद ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
फिलहाल घायल कर्मचारी का अस्पताल में इलाज जारी है। इस घटना ने बिजली विभाग में कर्मचारियों की सुरक्षा, काम के दौरान जरूरी उपकरणों की उपलब्धता और दुर्घटना के बाद इलाज की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि विभाग मामले की जांच कर आगे क्या कदम उठाता है।