मथुरा के महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल में लाखों रुपये की लागत से लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट सवालों के घेरे में है। कोरोना काल के दौरान मरीजों को ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस प्लांट को स्थापित किया गया था। लेकिन अब अस्पताल में भर्ती मरीजों की ऑक्सीजन की जरूरत पूरी करने के लिए बाहर से सिलेंडरों की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
इस ऑक्सीजन प्लांट का उद्घाटन तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने किया था। उस समय इस प्लांट को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था। लेकिन अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, प्लांट से मरीजों की जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए बाहर से सिलेंडर मंगाने पड़ रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि जब अस्पताल में ऑक्सीजन की जरूरत पूरी करने के लिए आज भी बाहरी सिलेंडरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, तो लाखों रुपये की लागत से लगाए गए इस प्लांट का पूरा लाभ मरीजों को क्यों नहीं मिल पा रहा है?
क्या ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता कम है, इसमें तकनीकी खराबी है या फिर इसके संचालन और रखरखाव में कोई कमी है? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
फिलहाल, जरूरत इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन इस मामले का संज्ञान लें, ऑक्सीजन प्लांट की कार्यक्षमता की जांच कराएं और यह सुनिश्चित करें कि मरीजों को समय पर पर्याप्त ऑक्सीजन मिल सके।
अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कब तक कार्रवाई करते हैं और जिला अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट की व्यवस्था कब तक दुरुस्त होती है।
मथुरा के जिला अस्पताल में लाखों रुपये की लागत से स्थापित ऑक्सीजन प्लांट से मरीजों की जरूरत पूरी नहीं हो पाने का मामला स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। अस्पताल में बाहर से ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है।
अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इस समस्या का संज्ञान लेकर क्या कदम उठाते हैं, ताकि मरीजों को बेहतर और निर्बाध स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।