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मांट की 101 साल पुरानी रामलीला में अंगद ने रावण को ललकारा, लक्ष्मण शक्ति लीला ने दर्शकों को किया भावुक

मांट में श्री आदर्श रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला में लक्ष्मण शक्ति, अंगद-रावण संवाद और विभीषण शरणागति सहित विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। कलाकारों के शानदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद और जीवंत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष रूप से अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति की लीला ने दर्शकों को रोमांचित करने के साथ भावुक भी कर दिया।

रामलीला के मंचन में दिखाया गया कि तीन दिन तक समुद्र से मार्ग देने की प्रार्थना करने के बावजूद जब समुद्र देव मार्ग नहीं देते, तब प्रभु श्रीराम क्रोधित होकर समुद्र को सुखाने के लिए अपने धनुष पर अग्निबाण चढ़ाते हैं। प्रभु श्रीराम के क्रोध को देखकर समुद्र देव प्रकट होते हैं और उनसे क्षमा याचना करते हुए लंका तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं। इसके बाद विभीषण शरणागति के प्रसंग का मंचन किया गया, जिसमें विभीषण भगवान श्रीराम की शरण में पहुंचते हैं और प्रभु उन्हें शरण प्रदान करते हैं।

इसके बाद अंगद-रावण संवाद का प्रभावशाली मंचन हुआ। भगवान श्रीराम के दूत बनकर लंका पहुंचे अंगद ने रावण की सभा में प्रभु श्रीराम का संदेश सुनाया और माता सीता को सम्मानपूर्वक वापस लौटाकर युद्ध से बचने की सलाह दी। अंगद के निर्भीक संवाद और रावण के अहंकार को दर्शाने वाले प्रसंग ने दर्शकों में विशेष उत्साह पैदा किया। वहीं, लक्ष्मण शक्ति की लीला में मेघनाद के शक्ति प्रहार से लक्ष्मण के मूर्छित होने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

101 वर्षों से जीवंत है मांट की रामलीला परंपरा

श्री आदर्श रामलीला समिति के प्रबंधक नेत्रपाल राघव ने बताया कि मांट में रामलीला का आयोजन पिछले 101 वर्षों से लगातार किया जा रहा है। यह क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। रामलीला के माध्यम से लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों, धर्म, सत्य, मर्यादा और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया जाता है। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण जरिया भी है।

दानदाताओं को माला पहनाकर किया सम्मानित

रामलीला के सफल आयोजन में समिति के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय लोगों का विशेष योगदान रहता है। इसी क्रम में समिति की ओर से आयोजन में आर्थिक सहयोग देने वाले दानदाताओं को माला पहनाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। समिति ने सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्रवासियों के सहयोग से ही वर्षों पुरानी इस धार्मिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस अवसर पर सत्येंद्र चौधरी, सतीश चौधरी, विवेक सिसोदिया, मनोज उपाध्याय, राजकुमार शर्मा, मुनीश गोयल सहित समिति के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में रामभक्त उपस्थित रहे।

मांट की 101 वर्षों पुरानी रामलीला आज भी क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी हुई है। भगवान श्रीराम की लीलाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को सत्य, धर्म, त्याग और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिल रही है।

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