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Friday, 16 Oct 2026
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अन्नदाताओं पर टूटा दुखों का पहाड़, मथुरा मंडी में जलभराव से धान-बाजरे की फसल जलमग्न

मथुरा में बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार हो रही बारिश के चलते मथुरा मंडी समिति परिसर में जलभराव की समस्या गंभीर हो गई है। मंडी में पानी भरने से किसानों की धान और बाजरे की फसल भीग गई है। इससे किसानों को अपनी उपज के उचित दाम नहीं मिलने और आर्थिक नुकसान होने की चिंता सता रही है। किसानों का आरोप है कि मंडी में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हर बार बारिश के दौरान उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

मथुरा मंडी समिति में जलभराव के चलते अन्नदाताओं की परेशानी बढ़ गई है। किसानों के अनुसार, 15 अक्टूबर से लगातार हो रही बारिश के कारण मंडी परिसर में पानी भर गया, जिससे धान और बाजरे की उपज प्रभावित हुई है। किसान अपनी मेहनत से तैयार फसल लेकर मंडी पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां फसल को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उनकी उपज बारिश में भीग रही है।

किसानों का कहना है कि मंडी में आढ़तियों और क्रय केंद्रों पर लाई जाने वाली उपज को दिन हो या रात, सड़क पर ही उतरवा दिया जाता है। ऐसे में बारिश होने पर फसल को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। भीगी हुई फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने की आशंका के चलते किसान आर्थिक नुकसान को लेकर चिंतित हैं।

किसानों ने मंडी समिति की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दूर-दराज से उपज लेकर आने वाले किसानों के ठहरने और रात में आराम करने के लिए मंडी में गेस्ट हाउस बनाए गए थे, लेकिन उन्हें इन सुविधाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों के मुताबिक, गेस्ट हाउस का उपयोग किसानों के बजाय मंडी समिति के कर्मचारी कर रहे हैं, जिसके चलते किसानों को ठहरने में परेशानी होती है।

बारिश और जलभराव से परेशान किसानों ने मंडी परिसर में जलनिकासी की उचित व्यवस्था कराने, उपज को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराने और किसानों के लिए बनाए गए गेस्ट हाउस की सुविधाएं उन्हें मुहैया कराने की मांग की है।

अब सवाल यह है कि किसानों की इन समस्याओं को लेकर मंडी प्रशासन कब तक कदम उठाता है और अन्नदाताओं को राहत दिलाने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।

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