योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की पावन जन्मभूमि मथुरा के हनुमान वाटिका में 51 कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ एवं जय स्वर्वेद कथा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं और संत प्रवर विज्ञान देव महाराज के आध्यात्मिक प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया। वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
कार्यक्रम में स्वर्वेद कथामृत के प्रवर्तक सुपूज्य संत प्रवर विज्ञान देव महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सच्ची शांति बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि शांत, निर्मल और जागृत अंतःकरण में प्राप्त होती है। मनुष्य के विचार ही उसके जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं। ध्यान और साधना के माध्यम से जब चेतना जागृत होती है, तो विचारों में शुद्धता, वाणी में मधुरता, व्यवहार में करुणा और कर्मों में सेवाभाव स्वतः विकसित होने लगता है।
इस अवसर पर आयोजित 51 कुंडीय हवन-यज्ञ में श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञाग्नि में आहुतियां समर्पित कीं। यज्ञ के माध्यम से विश्व शांति, मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक जागरण की कामना की गई।
आयोजकों ने बताया कि विहंगम योग संत समाज के 103वें वार्षिकोत्सव, समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव और 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ के निमित्त राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद संदेश एवं संकल्प यात्रा का शुभारंभ 18 जुलाई 2026 को कन्याकुमारी से किया गया था। यह यात्रा देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में स्वर्वेद के संदेश, ध्यान-साधना और आध्यात्मिक जागरण का प्रचार कर रही है।
इसी क्रम में मथुरा में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं को आगामी 14 और 15 दिसंबर 2026 को वाराणसी स्थित स्वर्वेद महामंदिर परिसर में होने वाले 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ एवं समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात करते हुए मानव सेवा, सद्भाव और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।