कोसीकलां में छाता शुगर मिल को लेकर चल रहे धरने के बीच वाल्मीकि समाज में भी विवाद सामने आया है। धरनाकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद गिर्राज वाल्मीकि द्वारा धरनास्थल पर पहुंचकर मुकदमा वापस लेने की बात कहे जाने पर समाज के कुछ लोगों ने नाराजगी जताई है।
वाल्मीकि समाज के नेता किशोर वाल्मीकि, सौरभ वाल्मीकि और लक्ष्मी नारायण वाल्मीकि ने बैठक कर गिर्राज वाल्मीकि के कदम का विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत निर्णय को पूरे वाल्मीकि समाज की राय के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि छाता शुगर मिल के धरने को वाल्मीकि समाज का सामूहिक समर्थन प्राप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज के नाम पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बैठक में नेताओं ने कहा कि वाल्मीकि समाज अपने सामाजिक हितों और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर एकजुट है। बिना सामूहिक सहमति के किसी व्यक्ति के बयान या निर्णय को पूरे समाज का निर्णय बताना उचित नहीं है।
समाज के प्रतिनिधियों ने लोगों से अपील की कि किसी भी बयान या दावे पर प्रतिक्रिया देने से पहले तथ्यों की पुष्टि करें और समाज में भ्रम की स्थिति पैदा करने वाले बयानों से बचें।