ब्रजभूमि में राधा रानी के प्रति अगाध श्रद्धा का अनूठा दृश्य देखने को मिल रहा है। पिछले 33 महीनों से बिना किसी रुकावट के अनवरत चल रही 'राधा रानी तीन वन परिक्रमा' अपने 34वें सोपान में प्रवेश कर चुकी है। शनिवार सुबह ठीक 8 बजे मांट तहसील के मुख्य द्वार से वैदिक मंत्रोच्चार और 'राधे-राधे' के जयघोष के साथ इस पावन परिक्रमा का शुभारंभ हुआ। बंसीवट के पूज्य संत श्री वृन्दावन दास जी महाराज के पावन सानिध्य में शुरू हुई इस परिक्रमा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
मांट से निकलकर परिक्रमा का कारवां सीधे राधारानी मानसरोवर की ओर बढ़ा। परिक्रमा मार्ग में स्थित 'भीम' गांव में ग्रामीणों ने पलक-पावड़े बिछाकर परिक्रमाार्थियों का भव्य स्वागत किया और 'बाल भोग' प्रसाद का वितरण किया। मानसरोवर के दर्शन के बाद परिक्रमा बेलवन स्थित सुप्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर पहुंची। मंदिर परिसर में भक्तों ने विश्राम कर महाप्रसादी ग्रहण की और भक्ति संगीत पर जमकर नृत्य-गायन किया।
इस अवसर पर पूज्य संत वृन्दावन दास जी महाराज ने बताया कि महज चंद लोगों से शुरू हुई इस यात्रा में अब हर सोपान के साथ हजारों लोग जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तीन वन की परिक्रमा को पूर्ण करने से श्रद्धालुओं को संपूर्ण चौरासी कोस परिक्रमा के समान ही पुण्य फल प्राप्त होता है। महाराज ने क्षेत्रवासियों से इस पुण्य यात्रा से अधिक से अधिक जुड़ने की अपील की।