जन्माष्टमी से पहले चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले करीब 15 दिनों में चीनी के दामों में लगातार बढ़ोतरी होने से गृहणियों, मिष्ठान विक्रेताओं और थोक व्यापारियों सभी पर इसका असर दिखाई देने लगा है। सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार त्योहारों की मिठास महंगी चीनी की वजह से फीकी पड़ जाएगी?
मथुरा, जो भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और पेड़े की मिठास के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है, वहां भी बढ़ती कीमतों का सीधा असर देखने को मिल रहा है। थोक व्यापारियों का कहना है कि गोदामों में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन महंगे दामों के कारण बाजार में मांग कम हो गई है।
व्यापारियों के अनुसार, जहां कुछ दिन पहले प्रतिदिन 80 से 100 बोरी चीनी की बिक्री हो जाती थी, वहीं अब बिक्री घटकर सिर्फ 15 से 20 बोरियां प्रतिदिन रह गई है। इससे थोक कारोबार की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है।
उधर, मिष्ठान विक्रेताओं का कहना है कि चीनी महंगी होने से मिठाई बनाने की लागत बढ़ गई है। यदि यही स्थिति बनी रही तो जन्माष्टमी पर पेड़ा और अन्य मिठाइयों की कीमतों में भी असर देखने को मिल सकता है।
इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बयान जारी कर इथेनॉल नीति को चीनी की बढ़ती कीमतों का प्रमुख कारण बताया है। हालांकि इस पर सरकार की ओर से अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं।
बढ़ती महंगाई के बीच गृहणियों का कहना है कि त्योहारों के समय चीनी जैसी आवश्यक वस्तु महंगी होने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले दिनों में चीनी के दाम स्थिर होते हैं या जन्माष्टमी तक और बढ़ते हैं।