लखनऊ/मथुरा, 11 अगस्त। जिला स्तर पर मान्यता प्राप्त पत्रकारों की दोबारा LIU (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) जांच कराए जाने के मामले में बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक विशाल सिंह ने जिला मान्यता प्राप्त संवाददाताओं की दोबारा LIU जांच नहीं कराने के निर्देश दिए हैं।
यह निर्णय उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के साथ हुई समन्वय बैठक में लिया गया। सूचना निदेशालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित बैठक की अध्यक्षता सूचना निदेशक विशाल सिंह ने की। बैठक में पत्रकारों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।
जिला मान्यता प्राप्त पत्रकारों की दोबारा LIU जांच के प्रस्ताव को लेकर ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ. कमल कांत उपमन्यु एडवोकेट ने उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी से बातचीत कर अपना विरोध पत्र सौंपा था। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के पत्रकारों ने भी इस मामले को लेकर समिति के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई थीं।
मामले को समिति के अध्यक्ष और सचिव द्वारा बैठक में प्रमुखता से उठाए जाने के बाद सूचना निदेशक ने इसे गंभीरता से लिया और दोबारा LIU जांच कराने संबंधी आदेश को निरस्त करने की दिशा में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
समन्वय बैठक के दौरान समिति के सचिव भारत सिंह ने पत्रकारों के हितों से संबंधित मांगों को क्रमवार निदेशक के समक्ष रखा। समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने प्रत्येक मांग के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए इनके जल्द समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में पत्रकारों के लिए 58 वर्ष की आयु में पेंशन सुविधा उपलब्ध कराने, मान्यता प्राप्त जिला संवाददाताओं की दोबारा LIU जांच नहीं कराने, पत्रकारों के लिए प्लॉट, आवास एवं फ्लैट आवंटन की व्यवस्था करने समेत कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं।
इसके अलावा राज्य एवं जिला मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकारों के सेवानिवृत्ति की निर्धारित आयु तक पहुंचने के बाद उनकी मान्यता को स्वतः वरिष्ठ एवं स्वतंत्र पत्रकार की श्रेणी में स्थानांतरित करने की मांग भी रखी गई।
पत्रकारों से संबंधित मान्यता के मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए मान्यता समिति का गठन करने की मांग की गई। वहीं दारुलशफा स्थित ए-ब्लॉक में फोटोग्राफरों के कार्यालय से संबंधित बकाया राशि का भुगतान करने की मांग भी सामने रखी गई।
पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए आयुष्मान कार्ड कैंप, चिकित्सा के लिए कैशलेस कार्ड, एसजीपीजीआई में बेहतर चिकित्सकीय व्यवस्था और चिकित्सा सहायता की सीमा को 25 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये किए जाने की मांग भी रखी गई।
इसके साथ ही स्वतंत्र एवं वरिष्ठ पत्रकारों और फोटो जर्नलिस्टों से नियमित रूप से समाचार, आलेख एवं फोटो सामग्री प्राप्त कर सरकारी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित करने और उचित पारिश्रमिक देने की मांग की गई।
समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के सजग प्रहरी के रूप में लगातार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, आवास और सम्मान से जुड़ी मांगों का समयबद्ध समाधान जरूरी है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग पत्रकारों से जुड़ी सभी मांगों पर सकारात्मक विचार करते हुए जल्द आवश्यक कार्रवाई करेगा।
वहीं समिति के सचिव भारत सिंह ने कहा कि समिति की ओर से रखी गई सभी मांगें पत्रकारों के व्यापक हित से जुड़ी हैं। इनका उद्देश्य राज्य एवं जिला मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकारों को बेहतर सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
बैठक में अपर निदेशक अरविन्द कुमार मिश्रा, सहायक निदेशक अमित यादव, वित्त नियंत्रक संजय सिंह सहित समिति के उपाध्यक्ष आकाश शेखर शर्मा, अविनाश मिश्रा, राघवेन्द्र त्रिपाठी, संयुक्त सचिव विजय कुमार त्रिपाठी और अनिल सैनी तथा कार्यकारिणी सदस्य रीतेश सिंह, अब्दुल वहीद, रेनू निगम, वेद प्रकाश दीक्षित, राघवेन्द्र प्रताप सिंह, नवेद शिकोह और सत्येंद्र कुमार राय समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
बैठक के बाद मान्यता प्राप्त जिला पत्रकारों की दोबारा LIU जांच नहीं कराने के निर्देश को पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है।