गुरुपूर्णिमा के अवसर पर हरिद्वार के प्रमुख आश्रमों और अखाड़ों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने अपने-अपने गुरुओं का विधि-विधान से पूजन किया और उनके चरणों में नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया। पूरे दिन धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और सत्संग का आयोजन होता रहा।
जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी के आश्रम में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाला मार्गदर्शक होता है। गुरु मनुष्य के जीवन में विवेक, ज्ञान और संस्कारों का संचार करता है तथा उसके सानिध्य से जीवन की शून्यता समाप्त होकर सही मार्ग की प्राप्ति होती है।
वहीं संत स्वामी रामेश्वरानंद ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी, विशेषकर Gen Z, में गुरु भाव से अधिक संस्कारों की आवश्यकता है। उनका कहना था कि गुरु ही व्यक्ति के भीतर अच्छे संस्कारों का विकास कर समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संत रविदेव शास्त्री ने भी गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि गुरु का सम्मान और उनके बताए मार्ग पर चलना ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है। उन्होंने कहा कि संस्कारित समाज के निर्माण में गुरु की भूमिका सर्वोपरि है।
गुरुपूर्णिमा के अवसर पर हरिद्वार के विभिन्न आश्रमों में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। भक्तों ने गुरु पूजन, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया और अपने गुरुओं से सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया।