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Tuesday, 28 Jul 2026
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मौत के बाद भी बना 'रियल हीरो'... 25 वर्षीय गौरव दवे के अंगदान से चार लोगों को मिली नई जिंदगी

मध्य प्रदेश के इंदौर से इंसानियत और अंगदान की मिसाल पेश करने वाली एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। 25 वर्षीय गौरव दवे भले ही इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन अपने अंतिम फैसले से उन्होंने चार लोगों को नई जिंदगी दे दी। उनके परिवार ने दुख की इस घड़ी में अंगदान का साहसिक निर्णय लेकर मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है।

इंदौर के खजूरी बाजार निवासी गौरव दवे पेशे से फिल्म कास्टिंग कोऑर्डिनेटर थे और अभिनय की दुनिया में अपना भविष्य बनाने का सपना देख रहे थे। कुछ दिन पहले उन्हें गंभीर ब्रेन हेमरेज हुआ, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के लगातार प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और आवश्यक चिकित्सीय प्रक्रिया के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।

परिवार के लिए यह पल बेहद कठिन था, लेकिन गौरव के माता-पिता, बहन, भाई और अन्य परिजनों ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने कई परिवारों में खुशियां लौटा दीं। उन्होंने गौरव के हृदय, लीवर, दोनों किडनी और आंखें दान करने की सहमति दे दी। इस निर्णय के बाद स्वास्थ्य विभाग, अस्पताल और स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन यानी SOTTO की टीम ने पूरी प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया।

गौरव का हृदय ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अहमदाबाद के यूएन मेहता अस्पताल भेजा गया, जहां 28 वर्षीय मरीज में उसका प्रत्यारोपण किया गया। वहीं उनका लीवर इंदौर के एक 42 वर्षीय मरीज को लगाया गया और दोनों किडनियां इंदौर की दो महिला मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं। इसके अलावा उनकी आंखें भी दान की गईं, जिससे अन्य लोगों की रोशनी लौटाने में मदद मिलेगी।

अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए इंदौर में 68वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। ट्रैफिक पुलिस और चिकित्सा टीमों के समन्वय से हृदय को महज कुछ ही मिनटों में एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से उसे विमान के जरिए अहमदाबाद भेजा गया। इसी तरह अन्य अंगों को भी निर्धारित अस्पतालों तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाया गया।

गौरव के इस महान योगदान को सम्मान देने के लिए उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अस्पताल परिसर में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, सामाजिक संगठनों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्पांजलि अर्पित की। पुलिस ने भी उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर श्रद्धांजलि दी।

गौरव दवे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका यह निर्णय चार लोगों के जीवन में नई उम्मीद, नई धड़कन और नया सवेरा लेकर आया है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि अंगदान केवल एक फैसला नहीं, बल्कि किसी के जीवन को बचाने वाला सबसे बड़ा मानव सेवा का कार्य है।

 
 
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