उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने लखनऊ में बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी FASTag बनाने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सीतापुर निवासी अनंत राम राठौर और नकीब खान के रूप में हुई है। दोनों को लखनऊ के पॉलीटेक्निक चौराहे के पास से गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन, दो पैन कार्ड और 4,230 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह फर्जी वाहन नंबर, फर्जी आरसी और फर्जी केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर FASTag जारी कराता था। इसके बाद इन FASTag का उपयोग दूसरे वाहनों पर किया जाता था, जिससे टोल टैक्स और ऑनलाइन चालान से बचा जा सके। इस फर्जीवाड़े के कारण सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
पूछताछ में सामने आया कि नकीब खान पहले खैराबाद टोल प्लाजा के पास पंचर की दुकान चलाता था। बाद में अनंत राम राठौर की मदद से वह इंडसइंड बैंक का FASTag एजेंट बना। वर्ष 2024 में अधिक कमाई के लालच में दोनों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर FASTag जारी करने का अवैध कारोबार शुरू कर दिया। आरोपियों ने स्वीकार किया कि एक फर्जी FASTag बनाने के बदले उन्हें करीब पांच हजार रुपये तक मिलते थे, जिसे दोनों आपस में बांट लेते थे।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि कुछ वाहन मालिकों ने फर्जी नंबरों का इस्तेमाल कर अपने वाहनों के लिए FASTag बनवाए और बाद में उन्हीं टैग का इस्तेमाल अन्य वाहनों पर भी किया। इससे टोल प्लाजा की निगरानी व्यवस्था को धोखा दिया जाता था और ऑनलाइन चालान से भी बचा जाता था।
फिलहाल एसटीएफ पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं, अब तक कितने फर्जी FASTag जारी किए गए और इस घोटाले में किसी अन्य बैंक एजेंट या व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।