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Saturday, 13 Jun 2026
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उदयपुर से आए श्रद्धालुओं ने यमुना किनारे किया 11 हजार दीपों का दीपदान, जगमगा उठा श्रीवल्लभ घाट

वृंदावन। ब्रजधाम में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा उस समय देखने को मिला जब राजस्थान के उदयपुर स्थित श्रीनाथजी नाथद्वारा से आए श्रद्धालुओं ने यमुना महारानी के चरणों में 11 हजार दीप अर्पित किए। श्रीवल्लभ घाट पर आयोजित इस भव्य दीपदान कार्यक्रम से पूरा यमुना तट दीपों की अलौकिक रोशनी से जगमगा उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया।

इस धार्मिक आयोजन में गजेन्द्र जी, उनकी धर्मपत्नी जूली एवं वेदांशु टांक परिवार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दीपों की सुनहरी आभा और यमुना तट पर गूंजते भजन-कीर्तन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव से सराबोर कर दिया।

तीर्थ गुरु ने बताया कि यह दीपदान यमुना महारानी की कृपा, ब्रजधाम की महिमा और सनातन आस्था के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ब्रजभूमि में किया गया प्रत्येक धार्मिक कार्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।

श्रद्धालु वेदांशु टांक ने कहा कि ब्रजधाम में पहुंचकर उन्हें अद्भुत शांति और आध्यात्मिक अनुभूति होती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वृंदावन में पूज्य इंद्रेश जी के सान्निध्य में भागवत कथा का आयोजन चल रहा है, जिसके अंतर्गत श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और सेवा कार्यों में भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान ठाकुरजी की मनमोहक नौका विहार लीला और छप्पन भोग का भी आयोजन किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भक्तों ने भजन-कीर्तन और आरती के माध्यम से यमुना महारानी की महिमा का गुणगान किया।

वेदांशु टांक ने अधिक मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पावन काल में दान, जप, तप और सेवा का विशेष महत्व है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से यमुना नदी के संरक्षण और स्वच्छता के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि "यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और संस्कृति की जीवनधारा हैं। उनकी स्वच्छता और संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।"

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