उत्तर प्रदेश की टीजीटी शिक्षक भर्ती परीक्षा में एक बार फिर नकल माफियाओं और सॉल्वर गैंग की सक्रियता सामने आई है। लखनऊ के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान चार ऐसे युवक पकड़े गए, जो दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। हालांकि परीक्षा में हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था और बायोमेट्रिक जांच के चलते उनकी चालाकी ज्यादा देर तक नहीं चल सकी और मौके पर ही उनका भंडाफोड़ हो गया।
जानकारी के मुताबिक परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों के फिंगरप्रिंट, आधार और फेस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया की जा रही थी। इसी दौरान चार युवकों की पहचान संदिग्ध पाई गई। जांच में सामने आया कि वे वास्तविक अभ्यर्थी नहीं थे, बल्कि उनकी जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। इसके बाद परीक्षा केंद्रों पर मौजूद अधिकारियों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे कोई संगठित सॉल्वर गैंग या नकल माफिया गिरोह काम कर रहा है, जो मोटी रकम लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी अभ्यर्थियों को बैठाने का काम करता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन युवकों को किसने भेजा और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
इस घटना ने एक बार फिर भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बायोमेट्रिक और डिजिटल सत्यापन की वजह से फर्जीवाड़े की यह कोशिश नाकाम हो गई और परीक्षा की शुचिता बरकरार रही।
चारों आरोपियों के खिलाफ संबंधित थानों में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए पूछताछ और तकनीकी जांच में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।